दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रंप सरकार द्वारा कर्ज को कम करने के तमाम प्रयासों के बावजूद वित्तीय चुनौतियां कम नहीं हो रही हैं। अमेरिका की कमाई (रेवेन्यू) का एक बहुत बड़ा हिस्सा अब सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है, जिसने पिछले 5 दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
इस आर्थिक दबाव के बीच पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव ने अमेरिका के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
ब्याज भुगतान में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड
अमेरिका का कुल कर्ज इस समय 39.28 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो उसकी कुल जीडीपी (GDP) का लगभग 125 फीसदी है। अगर कर्ज बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो अगस्त 2026 तक इसके 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने का अनुमान है।
कर्ज के प्रमुख आंकड़े:
- जीडीपी का 3.2% हिस्सा: अमेरिका के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है, जो जीडीपी का 3.2% हो चुका है। यह 1970 के दशक के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
- तीन गुना बढ़ोतरी: पिछले 5 वर्षों में अमेरिका का नॉमिनल इंटरेस्ट पेमेंट (ब्याज भुगतान) तीन गुना बढ़कर $1.22 ट्रिलियन (करीब 140%) हो चुका है, जो उसके नेशनल बजट का 15 फीसदी है।
- रक्षा बजट से ज्यादा ब्याज: इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब अमेरिका लगातार तीसरे साल अपनी रक्षा (National Defense) से ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च कर रहा है। ऐसा सिलसिला पिछले 46 वर्षों में नहीं देखा गया। इस समय अमेरिका का रक्षा खर्च जीडीपी का महज 3% रह गया है, जो साल 2000 के बाद सबसे कम है।
ईरान से मुकाबला: कैसे मैनेज होगा युद्ध का भारी खर्च?
इस गंभीर आर्थिक संकट के बीच पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव एक बार फिर चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।
ईरान के साथ चल रहे इस मोर्चे पर अमेरिका पहले ही अरबों डॉलर पानी की तरह बहा चुका है। एक अनुमान के मुताबिक, 28 फरवरी से 16 जून के बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़े संघर्ष पर करीब 113 अरब डॉलर खर्च किए हैं।
अमेरिका के सामने क्या है असली चुनौती?
अमेरिका का कुल सैन्य बजट भले ही बढ़कर $923 बिलियन पहुंच गया हो, लेकिन उसका $1.22 ट्रिलियन का भारी-भरकम सालाना ब्याज खर्च उसकी सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को अंदर से कमजोर कर रहा है।
बड़ा सवाल: एक तरफ घरेलू मोर्चे पर आसमान छूता कर्ज और रक्षा बजट से भी ज्यादा ब्याज का भुगतान, और दूसरी तरफ ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति में हर महीने अरबों डॉलर का सैन्य खर्च—इस दोहरे वित्तीय दबाव के बीच ट्रंप सरकार ईरान को लंबे समय तक कैसे चुनौती दे पाएगी, यह वैश्विक रणनीतिकारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।


