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    वायु अस्त्र: 100 किमी दूर दुश्मन नहीं बचेगा, बंकर और टैंक हो जाएंगे नष्ट

    भारत की सैन्य और रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुणे की निजी रक्षा कंपनी ‘निबे लिमिटेड’ (Nibe Limited) ने 100 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ‘वायु अस्त्र-1’ (Vayu Astra-1) लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणाली (घातक ड्रोन/आत्मघाती हथियार) का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। इस सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना को भविष्य के युद्धों के लिए एक अभूतपूर्व और आधुनिक ताकत मिलने की उम्मीद है।

    अचूक मारक क्षमता और परीक्षण स्थल

    यह परीक्षण ‘नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट’ (NCNC) के आधार पर सेना और रक्षा मंत्रालय के सामने आयोजित किया गया था। रक्षा मंत्रालय की इस प्रक्रिया में परीक्षण का खर्च सरकार नहीं उठाती और न ही शुरुआत में खरीद की बाध्यता होती है। यह परीक्षण दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में किया गया:

    1. पोखरण (राजस्थान): 18 और 19 अप्रैल को हुए इस परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ के एंटी-पर्सनल वैरिएंट ने 10 किलोग्राम वारहेड (गोला-बारूद) के साथ भाग लिया और पहली ही कोशिश में 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को बेहद सटीकता से ध्वस्त कर दिया। इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) एक मीटर से भी कम रहा, जो इसकी अचूकता को दर्शाता है।
    2. जोशीमठ, मलारी (उत्तराखंड): 26 और 27 अप्रैल को इस हथियार की अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में सहनशीलता जांची गई। यहां वायु अस्त्र ने 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर 90 मिनट से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक उड़ान भरकर अपना मिशन पूरा किया।

    इजरायली तकनीक और आधुनिक विशेषताएं

    कंपनी के अनुसार, यह अत्याधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन इजरायली तकनीक पर आधारित है। इसमें ‘अबॉर्ट-अटैक’ (हमला बीच में रोकने) और ‘री-अटैक’ (दोबारा हमला करने) जैसी विशेषताएं शामिल हैं। रात के समय परीक्षण (नाइट स्ट्राइक) के दौरान इसने इन्फ्रारेड (IR) कैमरे की मदद से दो मीटर से कम के दायरे में एंटी-आर्मर (टैंक-रोधी) लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा। इसके अतिरिक्त, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से 70 किलोमीटर दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल सेगमेंट तक नियंत्रण स्थानांतरित करने और मिशन समाप्त होने पर दोबारा इस्तेमाल के लिए हथियार को सुरक्षित रिकवर करने की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया गया।

    इन तकनीकों के शामिल होने से भारतीय सेना दुर्गम पहाड़ी और मैदानी दोनों ही मोर्चों पर दुश्मन के ठिकानों, बंकरों और टैंकों को बिना खुद को जोखिम में डाले आसानी से नष्ट कर सकेगी।

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