कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बाद अब सोशल मीडिया पर ‘E20 जनता पार्टी’ नामक एक नया उपभोक्ता अधिकार अभियान तेजी से उभर रहा है। देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिलाने के अनिवार्य फैसले के खिलाफ आम नागरिक और वाहन मालिक एकजुट हो रहे हैं। महज कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 22,000 से अधिक और इंस्टाग्राम पर 30,000 से ज्यादा लोग इस मुहीम से जुड़ चुके हैं।
1. ‘हमारी गाड़ियों पर एक्सपेरिमेंट बंद करो’: सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
E20 जनता पार्टी खुद को आम नागरिकों और वाहन मालिकों की आवाज बता रही है। सोशल मीडिया पर जारी अभियान में लोगों का तर्क है कि मेहनत की कमाई से खरीदी गई गाड़ियाँ कंपनियों के नियमों के तहत बनाई गई हैं, उन पर जबरन नए फ्यूल ब्लेंड का परीक्षण नहीं होना चाहिए।
E20 जनता पार्टी का सोशल मीडिया संदेश: “हमारी कारों पर एक्सपेरिमेंट करना बंद करो! भारत फ्यूल में विकल्प की आजादी चाहता है। हमारी गाड़ियां कोई टेस्ट मशीन नहीं हैं जिन्हें हमने टैक्स देकर अपनी मेहनत की कमाई से खरीदा है। गाड़ियों की परफॉर्मेंस और माइलेज का सीधा असर मिडिल क्लास के बजट पर पड़ता है।”
2. क्या हैं E20 जनता पार्टी की प्रमुख मांगें?
पार्टी ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
| मुख्य मांग | विवरण व तर्क |
| शुद्ध पेट्रोल का विकल्प | उपभोक्ताओं को 100% एथेनॉल-फ्री (E0) या मैन्युफैक्चरर की सलाह के अनुसार शुद्ध पेट्रोल चुनने की आजादी दी जाए। |
| इंजनों पर परीक्षण की रोक | पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पंप और इंजेक्टर खराब होने तथा घटते माइलेज की शिकायत पर संज्ञान लिया जाए। |
| उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा | जिस ईंधन के लिए पैसे दिए जा रहे हैं, वही मिले; आम जनता पर नीतिगत प्रयोग न थोपे जाएं। |
3. किस मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग और CJP से तुलना?
जैसे NEET विवाद पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी और लंबे दबाव के बाद उनका इस्तीफा हुआ, उसी तर्ज पर अब E20 जनता पार्टी ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
- जवाबदेही तय करने की मांग: प्रदर्शनकारियों और सोशल मीडिया हैंडल का कहना है कि गाड़ियों के असमय खराब होने और ईंधन दक्षता में आ रही भारी गिरावट के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय जिम्मेदार है।
- इस्तीफे का दबाव: यदि सरकार शुद्ध पेट्रोल (E0) का विकल्प उपलब्ध नहीं कराती और ईंधन के दामों में राहत नहीं देती, तो पेट्रोलियम मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
NEET आंदोलन के बाद अब ईंधन ब्लेंडिंग का यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।


