ऐसी कई घटनाएं होती हैं जो इतिहास की दिशा तो बदलती ही हैं, किसी आम इंसान की जिंदगी को भी हमेशा के लिए पलट देती हैं। 12 जून 2025 को एक खौफनाक विमान हादसे और उसके वीडियो ने अहमदाबाद के एक आम लड़के 18 साल का आर्यन असारी को ‘एयरोप्लेन बॉय’ (Aeroplane Boy) के नाम से मशहूर कर दिया। उसके मोबाइल में आज भी मौत का वह खौफनाक मंजर कैद है, जिसने देखते ही देखते 260 से अधिक जिंदगियों को राख के ढेर में बदल दिया था।
‘एयरोप्लेन बॉय’ की आंखों देखी कहानी
यह कहानी उस प्रत्यक्षदर्शी की है जो हादसे के वक्त ग्राउंड जीरो पर मौजूद था। उसने आसमान से एक विमान को अनियंत्रित होकर जमीन की तरफ आते देखा। जब तक कोई कुछ समझ पाता, उसने अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर लिया। उसके फोन में कैद वीडियो में साफ दिख रहा था कि कैसे एक विशालकाय विमान धू-धू कर जलते हुए आबादी वाले इलाके के करीब क्रैश हो गया।
कैमरे में कैद वे आखिरी पल इतने भयावह थे कि चीख-पुकार और धमाकों की आवाज ने उस लड़के को अंदर तक झकझोर दिया। इस घटना के बाद से ही उसे स्थानीय लोग और मीडिया जगत ‘एयरोप्लेन बॉय’ के नाम से जानने लगा।
मोबाइल में कैद ‘260 मौतों’ से पहले का सच
हादसे का शिकार हुए इस विमान में चालक दल (Crew Members) समेत 260 से अधिक लोग सवार थे। ‘एयरोप्लेन बॉय’ के मोबाइल में कैद फुटेज इस त्रासदी की जांच में सबसे अहम तकनीकी सबूत बन गया।
- वीडियो का सच: इस वीडियो में ब्लैक बॉक्स मिलने से पहले ही यह साफ हो गया था कि विमान हवा में ही संतुलन खो चुका था और उसके इंजन से भीषण धुआं निकल रहा था।
- जांच का आधार: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) जैसी शीर्ष जांच एजेंसियों ने इस लड़के के मोबाइल फुटेज को अपनी जांच का मुख्य हिस्सा बनाया ताकि हादसे के सटीक समय और तकनीकी खराबी के क्रम (Sequence of events) को समझा जा सके।
एक वीडियो ने बदल दी जिंदगी
इस हादसे ने उस लड़के के दिलो-दिमाग पर ऐसा गहरा असर डाला कि उसकी पूरी जिंदगी का मकसद ही बदल गया।
- मानसिक आघात और बदलाव: सैकड़ों लोगों को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखने के बाद वह कई महीनों तक सदमे में रहा, लेकिन बाद में उसने इस दर्द को अपनी ताकत बनाया।
- विमान सुरक्षा के प्रति जागरूकता: वह लड़का अब सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों के जरिए विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) और आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन्स को लेकर जागरूकता फैलाता है।
यह वीडियो न केवल 260 मासूमों की मौत से ठीक पहले की गवाही देता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि तकनीकी रूप से हम चाहे जितने उन्नत हो जाएं, प्रकृति और आसमान की गोद में सुरक्षा की एक छोटी सी चूक कितनी आत्मघाती साबित हो सकती है।


