कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों (‘बंदी सिंहों’) की रिहाई की मांग को लेकर बुलाए गए पंजाब बंद के दौरान राज्य भर में व्यापक असर देखने को मिला है। 15 अगस्त को चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प तथा आंसू गैस के गोलों एवं वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद कौमी इंसाफ मोर्चा ने 21 अगस्त को सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया था। मोहाली और चंडीगढ़ से सटे सीमावर्ती इलाकों में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। संवेदनशील चौराहों और राजमार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
बाजार बंद और हाईवे प्रभावित
बंद के असर से पंजाब के प्रमुख शहरों और कस्बों में वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और दुकानों के शटर नहीं उठे। मोहाली और आसपास के नेशनल हाईवे पर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और रुकावटों के कारण यातायात काफी प्रभावित हुआ। सार्वजनिक बसों और टैक्सी सेवाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ा, जिससे आम यात्रियों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मुख्य मांगें और समर्थन
मोर्चे की मुख्य मांग पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे जगतार सिंह हवाला को पैरोल देने और अपनी सजा पूरी कर चुके अन्य ‘बंदी सिंहों’ को रिहा करने की है। इस बंद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और कई अन्य सिख धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है। SGPC ने अपने प्रशासनिक कार्यालयों और संस्थानों को बंद रखने की घोषणा की।
आपातकालीन सेवाओं को छूट
मोर्चा नेताओं के अनुसार, एम्बुलेंस, अस्पताल, मेडिकल स्टोर, विवाह समारोह और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों जैसे आपातकालीन एवं आवश्यक सेवाओं को बंद के दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।


