पाकिस्तान की सियासत और कानूनी गलियारों में देर रात उस समय भारी ड्रामा देखने को मिला, जब पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया और महज कुछ घंटों के मेडिकल चेक-अप के बाद वापस अदियाला जेल भेज दिया गया।
देर रात का ड्रामा और अस्पताल से वापसी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 73 वर्षीय इमरान खान को कड़ी सुरक्षा और करीब 800 पुलिसकर्मियों के पहरे के बीच मध्यरात्रि अस्पताल पहुंचाया गया था। उन्हें मुख्य रूप से आंखों की समस्या (राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन) और उच्च रक्तचाप की जांच के लिए लाया गया था। हालांकि, छह विशेषज्ञ डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा मेडिकल टेस्ट किए जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें कस्टडी में रहने के लिए फिट करार दिया, जिसके तुरंत बाद उन्हें दोबारा रावलपिंडी की अदियाला जेल की कोठरी में स्थानांतरित कर दिया गया।
कानूनी जंग और शहबाज सरकार का रुख
अस्पताल में लंबे समय तक इलाज या भर्ती की उम्मीद लगाए बैठी PTI के लिए यह बड़ा झटका है। शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निजी अस्पताल में भर्ती कराने वाले आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका (Review Petition) भी दायर की थी, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि किसी सजायाफ्ता कैदी को जेल या सरकारी अस्पताल में ही इलाज दिया जा सकता है।
शहबाज सरकार के लिए ‘टिक-टॉक, टिक-टॉक’ का मतलब
पाकिस्तान की राजनीति में इस घटनाक्रम को केवल स्वास्थ्य मुद्दे से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। विश्लेषकों और पीटीआई समर्थकों के मुताबिक, सत्ताधारी गठबंधन और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए ‘टिक-टॉक, टिक-टॉक’ यानी उल्टी गिनती शुरू होने के तीन प्रमुख कारण हैं:
- जनता और अदालती दबाव: सुप्रीम कोर्ट द्वारा इमरान खान को राहत देने और हफ्ते में परिवार से मिलने की अनुमति देने के बाद PTI का मनोबल बढ़ा है।
- व्यापक विरोध प्रदर्शन: पीटीआई ने सरकार के खिलाफ 27 सितंबर को राष्ट्रव्यापी मार्च का ऐलान कर रखा है, जिससे राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है।
- सेना व बैकचैनल वार्ता की अटकलें: पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और बैकचैनल सौदों को लेकर लगातार अटकलबाजी का दौर जारी है, जिससे मौजूदा पीएमएल-एन सरकार की राजनीतिक जमीन खिसकने का डर बना हुआ है।
तीन साल से जेल में बंद इमरान खान भले ही दोबारा अदियाला जेल पहुंच गए हों, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कड़े तेवर और सड़कों पर पीटीआई के बढ़ते दबाव ने शहबाज शरीफ की सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।


