पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य इस समय कुदरत के भीषण प्रकोप का सामना कर रहे हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, भीषण बाढ़ और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में देखने को मिल रही है, जहां पहाड़ी इलाकों में चट्टानें खिसकने और नदियां उफान पर आने से भयावह मंजर पैदा हो गया है।
अरुणाचल प्रदेश: अंजॉ जिले में बाढ़ और सेना शिविर पर मार
अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है।
- अंजॉ जिले में तबाही: भारी वर्षा से अरुणाचल के अंजॉ (Anjaw) जिले में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। कई इलाकों में मुख्य सड़कों पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आने से यातायात ठप पड़ गया है।
- सेना का शिविर प्रभावित: मौसम के इस कहर की चपेट में भारतीय सेना का एक कैंप भी आ गया है। बाढ़ और मलबे की वजह से शिविर को काफी नुकसान पहुंचा है। राहत एवं बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं।
सिक्किम: कई मुख्य मार्ग बंद, टूरिस्ट फंसे
सिक्किम के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की कई घटनाएं सामने आई हैं:
- मुख्य राजमार्गों पर पहाड़ टूटकर गिरने से कई जिलों का संपर्क पूरी तरह कट गया है।
- लगातार बारिश के कारण तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
- भूस्खलन के कारण यातायात ठप होने से सैकड़ों पर्यटक भी विभिन्न इलाकों में फंस गए हैं
नदियों के उफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त. Source: किसान इंडिया
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी और अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) की चेतावनी जारी की है।
- ऑरेंज और रेड अलर्ट: अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और सिक्किम के विभिन्न हिस्सों के लिए अलर्ट जारी किया गया है।
- भूस्खलन का खतरा: IMD के अनुसार, पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी के धंसने (Landslides) और फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) का खतरा अगले कुछ दिनों तक लगातार बना रहेगा।
- प्रशासन की अपील: आपदा प्रबंधन विभागों और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अति-आवश्यक काम न होने पर पहाड़ी इलाकों में यात्रा न करने और नदियों व झरनों के पास न जाने की अपील की है।
पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों असम और मेघालय में भी नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर होती जा रही है। NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैद हैं।


