संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ‘1267 एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम’ की नवीनतम रिपोर्ट में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण कार विस्फोट को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि नवंबर 2025 में हुए इस आतंकी हमले के पीछे ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) से जुड़े एक आतंकी संगठन का हाथ था।
अंसार गजवत-उल-हिंद के जरिए अंजाम दिया हमला
यूएन रिपोर्ट और भारतीय जांच एजेंसी (NIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साजिश को अल-कायदा के सहयोगी गुट अंसार गजवत-उल-हिंद के जरिए अंजाम दिया गया था:
- गाड़ी में आईईडी का इस्तेमाल: हमलावरों ने वाहन आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) का उपयोग किया था, जिसमें ट्राईएसीटोन ट्राईपरॉक्साइड (TATP) जैसे घातक विस्फोटक रसायन का इस्तेमाल हुआ था।
- भारी तबाही: 10 नवंबर 2025 को हुए इस भीषण धमाके में 11 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
- आतंकियों की पहचान: धमाके के आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी समेत लगभग 10 संदिग्ध AQIS के इस क्षेत्रीय मॉड्यूल से सीधे जुड़े पाए गए।
केमिकल वेपन्स और ग्लोबल नेटवर्क की चिंता
UNSC की 30 पन्नों की इस रिपोर्ट में वैश्विक आतंकी संगठनों द्वारा रसायनिक (Chemical) और बायोलॉजिकल हथियार तैयार करने की कोशिशों पर गहरी चिंता जताई गई है:
- बांग्लादेश में नेटवर्क स्थापित करने की कोशिश: AQIS और ISIL (दाएश) जैसे आतंकी गुट दक्षिण एशिया, विशेषकर बांग्लादेश में नए आतंकी सेल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
- रिसिन और बायोलॉजिकल खतरा: रिपोर्ट में बताया गया है कि आतंकी संगठन रिसिन (Ricin) जैसे घातक रसायनों और टॉक्सिन के इस्तेमाल के निर्देश अपने समर्थकों में फैला रहे हैं।
भारत के लिए बढ़ी सुरक्षा चुनौतियां
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन और अन्य देशों में पढ़ाई या प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके तत्वों से जुड़े पाए गए हैं। गुजरात एटीएस और एनआईए (NIA) द्वारा इस मामले में डॉक्टरों समेत कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र के इस नए खुलासे के बाद भारत की सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने देश भर में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया है।


