पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) ने भारत के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) के मुद्दे पर सीधे तौर पर युद्ध की गीदड़भभकी दी है। कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में साफ किया गया है कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी हरकत को ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) माना जाएगा। सेना ने चेतावनी दी है कि इसे देश के ‘अस्तित्व पर हमला’ मानते हुए सभी जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएंगे। पाकिस्तान लगातार भारत की पनबिजली परियोजनाओं का विरोध करता आ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सरजमीं पर बढ़ रहे चौतरफा संकट को छुपाने के लिए भारत और अफगानिस्तान को एक साथ घेरने की कोशिश की है। असीम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (Core Commanders Conference) के बाद पाकिस्तानी सेना द्वारा जारी इस बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सिंधु जल संधि पर गीदड़भभकी और ‘सभी विकल्प खुले’ का दावा
- ‘सभी जरूरी कदम’ उठाने का संकल्प: जनरल असीम मुनीर ने कहा है कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को सुरक्षित करने के लिए पाकिस्तानी सेना “सभी जरूरी कदम” उठाने और “सभी विकल्प” आजमाने के लिए तैयार है।
- पानी की किल्लत और बौखलाहट: भारत द्वारा सिंधु जल समझौते के कड़े रुख और जल संसाधनों के रणनीतिक उपयोग को लेकर उठाए गए कदमों के बाद से पाकिस्तान के कई हिस्सों में पानी का गंभीर संकट (Water Crisis) खड़ा हो गया है। इसी कूटनीतिक दबाव के कारण पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व में भारी बौखलाहट दिखाई दे रही है।
- 1960 की संधि का रोना: साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि नदियों के पानी का बंटवारा करती है, लेकिन पाकिस्तान अपनी अंदरूनी कमियों और जल प्रबंधन की विफलता का पूरा दोष लगातार भारत पर मढ़ने का प्रयास कर रहा है।
अफगानिस्तान और भारत के ‘गठबंधन’ का झूठा आरोप
पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने देश के भीतर हो रहे भीषण आतंकी हमलों और सुरक्षा तंत्र की नाकामी का ठीकरा एक बार फिर पड़ोसी मुल्कों के सिर फोड़ा है:
- TTP को भारत की मदद का दावा: असीम मुनीर ने आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य चरमपंथी गुटों को भारत से आर्थिक और रणनीतिक मदद मिल रही है, जिसके जरिए वे पाकिस्तान में लगातार हिंसा फैला रहे हैं।
- अफगान तालिबान को चेतावनी: मुनीर ने कहा कि अफगानिस्तान में काबुल की तालिबान सरकार को यह समझना होगा कि क्षेत्रीय शांति इस बात पर टिकी है कि ‘भारतीय प्रॉक्सी’ (भारतीय समर्थित गुटों) को अफगान जमीन का इस्तेमाल न करने दिया जाए।
‘ऑपरेशन गजब-उल-हक’ का ऐलान
आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा के बहाने पाकिस्तानी सेना ने अब अफगानिस्तान के नियंत्रण वाले सीमावर्ती इलाकों में आक्रामक रुख अपनाने की बात कही है:
- पाक सेना ने साफ किया है कि वे ‘ऑपरेशन गजब-उल-हक’ के तहत अफगान तालिबान के नियंत्रण वाले इलाकों से पनपने वाले आतंकवाद के खिलाफ ‘इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन’ (Intelligence-based operations) जारी रखेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व जब भी अंदरूनी मोर्चे, आर्थिक बदहाली और घरेलू सुरक्षा में नाकाम होता है, वह जनता का ध्यान भटकाने के लिए हमेशा भारत और बाहरी ताकतों के खिलाफ इस तरह का जहर उगलता रहा है।


