अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे की चोरी को लेकर गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) की बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। इस रिपोर्ट ने मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट से साफ हुआ है कि मंदिर परिसर के भीतर बड़े पैमाने पर नोटों की गड्डियां और खुले पैसे गायब किए जा रहे थे।
SIT रिपोर्ट के मुख्य और सनसनीखेज खुलासे नीचे दिए गए हैं:
कैमरे में 70 बार कैद हुई चोरी की वारदात
जांच रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह हुआ है कि राम मंदिर के काउंटरों और दानपात्रों से पैसे चुराने की घटनाएं कोई एक-दो बार नहीं, बल्कि कम से कम 70 बार सीसीटीवी कैमरों में साफ तौर पर कैद हुईं।
- अप्रैल से पहले ही शुरू हो गया था खेल: रिपोर्ट के अनुसार, यह चोरी 27 अप्रैल 2026 से काफी पहले से लगातार चल रही थी।
- चोरी का तरीका: आरोपी इतनी सफाई से वारदातों को अंजाम दे रहे थे कि कैमरों की मौजूदगी के बावजूद वे आसानी से नोटों की गड्डियां और भक्तों द्वारा चढ़ाए गए खुले नोट अपनी जेबों और कपड़ों में छुपा लेते थे। रोजाना लाखों रुपये के चढ़ावे के बीच इस हेरफेर को लंबे समय तक पकड़ा नहीं जा सका।
पहली बार सामने आई SIT रिपोर्ट की मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत और बढ़ते विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की गहन जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया था। पहली बार सामने आई आधिकारिक रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- लक्षण और संलिप्तता: जांच टीम ने पाया कि इस पूरे घोटाले में मंदिर के दान प्रबंधन विभाग (Donation Management) और काउंटरों पर तैनात कुछ चुनिंदा कर्मचारियों व सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत थी। बिना आपसी साठगांठ के इतने सुरक्षित क्षेत्र में 70 बार चोरी होना नामुमकिन था।
- नोटों की छंटनी के दौरान हेरफेर: सबसे ज्यादा चोरी उस वक्त की जाती थी जब मुख्य दानपात्रों से पैसे निकालकर उनकी गिनती और गड्डियां बनाने का काम चल रहा होता था।
- प्रशासनिक लापरवाही: रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले चढ़ावे की मॉनिटरिंग के लिए जो ‘डबल-चेक’ सिस्टम होना चाहिए था, वह जमीनी स्तर पर बेहद कमजोर या नदारद था।
ट्रस्ट पर बढ़ा दबाव, शुरू हुई बड़ी कार्रवाई
इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश शासन में हड़कंप मच गया है। हाल ही में इस घोटाले की गाज ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर भी गिरी है:
बड़ी कार्रवाई: राम मंदिर चंदा और चढ़ावा चोरी मामले में भारी विवाद के बाद महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। अब मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन की कमान कृष्ण मोहन राय को सौंप दी गई है।
SIT ने अपनी रिपोर्ट सौंपने के साथ ही दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बैंक स्तर की अत्याधुनिक सुरक्षा और कैश-काउंटिंग सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया है। इस खुलासे के बाद विपक्ष भी लगातार सरकार और ट्रस्ट को आड़े हाथों ले रहा है।


