ओडिशा के गंजाम जिले के बाकलिकोडा गांव के रहने वाले जिगर नायक (Jigar Naik) की कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता की दास्तान नहीं है, बल्कि यह एक मां के अटूट विश्वास, कड़े संघर्ष और कभी न हार मानने वाले जज्बे की मिसाल है। पिता के आकस्मिक निधन के बाद, उनकी मां ने गहने गिरवी रखकर और दिन-रात कपड़े सिलकर जिगर की पढ़ाई का खर्च उठाया और अंततः उनका आईआईटी (IIT) जाने का सपना पूरा कराया।
पिता का साया उठने के बाद गहराया संकट
जिगर नायक का परिवार एक छोटे से गांव में रहता था। उनके पिता परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, लेकिन जब जिगर बहुत छोटे थे, तभी एक गंभीर बीमारी के कारण उनके पिता का असमय निधन हो गया। पिता की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। कोई नियमित आय न होने के कारण घर चलाने और बच्चों की शुरुआती स्कूली शिक्षा जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया।
ऐसी कठिन परिस्थिति में जिगर की मां आशाबेन नायक (Ashaben Naik) ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तय किया कि वह अपने पति के असमय चले जाने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई को रुकने नहीं देंगी।
मां का संघर्ष: सिलाई मशीन और गिरवी रखे गहने
घर के खर्च और जिगर की पढ़ाई की फीस भरने के लिए आशाबेन ने सिलाई का काम शुरू किया।
- दिन-रात सिलाई: वह सुबह से लेकर देर रात तक स्थानीय लोगों के कपड़े सिलती थीं। कई बार सीजन के समय वह रात में सिर्फ 2-3 घंटे ही सो पाती थीं ताकि ज्यादा से ज्यादा ऑर्डर पूरे कर सकें और कुछ अतिरिक्त पैसे कमा सकें।
- गहने गिरवी रखकर लिया कर्ज: जब जिगर ने स्कूल की पढ़ाई पूरी की और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (JEE) की तैयारी के लिए कोचिंग और स्टडी मटेरियल की जरूरत पड़ी, तो सिलाई की मामूली कमाई कम पड़ने लगी। जिगर की कोचिंग की भारी-भरकम फीस चुकाने के लिए आशाबेन ने बिना झिझके अपने पास बचे आखिरी कीमती गहने एक स्थानीय साहूकार के पास गिरवी रख दिए और कर्ज लिया। उन्होंने कहा, “गहने तो दोबारा बन जाएंगे, लेकिन बेटे का भविष्य और पढ़ाई का यह समय कभी लौटकर नहीं आएगा।”
जिगर की लगन: 14-16 घंटे की कड़ी मेहनत
मां के इस बेमिसाल त्याग और आंखों में छिपे सपनों को जिगर ने बहुत करीब से देखा था। उन्होंने ठान लिया था कि वह अपनी मां की इस मेहनत को बेकार नहीं जाने देंगे।
जिगर ने बिना किसी महंगे गैजेट या विलासिता के, एक छोटे से कमरे में टेबल लैंप की रोशनी में पढ़ाई शुरू की। वह रोजाना 14 से 16 घंटे तक पढ़ाई करते थे। सोशल मीडिया और दोस्तों से पूरी तरह दूरी बनाकर उनका पूरा ध्यान सिर्फ फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने पर था। जब भी वह थकते या निराश होते, तो घर के कोने में चलती सिलाई मशीन की आवाज और मां की सूजी हुई आंखें उन्हें फिर से दोगुनी ऊर्जा से भर देती थीं।
रंग लाई मेहनत: मिल गया IIT में दाखिला
कड़ी मेहनत और मां की दुआओं का असर रंग लाया। जब जेईई (JEE) का परिणाम घोषित हुआ, तो जिगर ने शानदार रैंक के साथ परीक्षा पास की और देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में अपनी जगह पक्की कर ली।
जिगर का संदेश: अपनी सफलता पर भावुक होते हुए जिगर ने कहा, “यह सफलता मेरी नहीं, मेरी मां की है। अगर उन्होंने दिन-रात कपड़े न सिले होते और अपने गहने दांव पर न लगाए होते, तो मैं आज इस मुकाम पर कभी नहीं पहुंच पाता। अब मेरा एकमात्र लक्ष्य पढ़-लिखकर एक बेहतरीन इंजीनियर बनना और अपनी मां को दुनिया की हर खुशी देना है।”


