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    ‘CM’ का मतलब चीफ मिनिस्टर नहीं, बल्कि ‘करप्ट माउथ’, जानें क्यों योगी पर भड़के अखिलेश यादव

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर एक बार फिर तीखे हो गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर किए गए ‘टोंटी वाले’ तंज पर अब अखिलेश यादव ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। सपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री (CM) के पदनाम की एक नई परिभाषा गढ़ते हुए योगी आदित्यनाथ को ‘करप्ट माउथ’ (Corrupt Mouth – भ्रष्ट जुबान) कह डाला है।

    क्या था ‘टोंटी’ वाला विवाद?

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘टोंटी’ का विवाद काफी पुराना है। जब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सरकारी बंगला खाली किया था, तब उन पर बंगले से टोंटियां और अन्य सरकारी सामान ले जाने के आरोप लगे थे। भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर सार्वजनिक मंचों और चुनावी रैलियों में इस मुद्दे को लेकर अखिलेश यादव पर तंज कसते रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने इस पुराने संदर्भ का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख पर निशाना साधा था।

    अखिलेश यादव का तीखा पलटवार

    योगी आदित्यनाथ के इस पुराने तंज पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक पदनाम ‘CM’ का इस्तेमाल करते हुए सीधे उनकी भाषा और शैली पर सवाल उठाए:

    • भाषा की मर्यादा पर सवाल: अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के मुंह से इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती।
    • ‘करप्ट माउथ’ का तमगा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यहाँ ‘CM’ का असली मतलब चीफ मिनिस्टर नहीं, बल्कि ‘करप्ट माउथ’ (Corrupt Mouth) हो चुका है, क्योंकि उनकी जुबान से केवल दूसरों के खिलाफ जहर और अमर्यादित टिप्पणियां ही निकलती हैं।
    • विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप: सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि योगी सरकार बिजली संकट, कानून-व्यवस्था, और युवाओं के रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर पूरी तरह विफल रही है। अपनी नाकामियों को छुपाने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए मुख्यमंत्री इस तरह के पुराने और बेबुनियाद निजी हमले कर रहे हैं。

    गरमाई उत्तर प्रदेश की सियासत

    उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक सरगर्मियों और उपचुनावों के माहौल के बीच दोनों शीर्ष नेताओं का यह आमने-सामने का टकराव राज्य की राजनीतिक तपिश को और बढ़ा रहा है। जहां भाजपा लगातार सपा के ‘पुराने कारनामों’ को याद दिलाकर उसे घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं अखिलेश यादव अब रक्षात्मक होने के बजाय हर हमले का उसी आक्रामकता के साथ जवाब दे रहे हैं।

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