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    50 स्थानों पर खुलेंगे E85 पेट्रोल पंप, देश-सरकार और किसानों को फायदा, जानें किन वाहनों में उपयोगी

    भारत में ग्रीन मोबिलिटी (हरित गतिशीलता) और ईंधन के घरेलू विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (5 जून) के अवसर पर दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल (IOCL) के पंप पर देश के पहले सार्वजनिक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग पॉइंट का उद्घाटन किया।

    इस नए हाई-इथेनॉल ईंधन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है, जो सामान्य पेट्रोल के मुकाबले सीधे ₹20 कम है। जहां दिल्ली में सामान्य पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर है, वहीं E85 पेट्रोल की कीमत ₹82.12 प्रति लीटर तय की गई है।

    क्या है E85 फ्यूल और विस्तार की योजना?

    E85 एक उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधन (High-Ethanol Blended Fuel) है, जिसमें 80 से 85% इथेनॉल और मात्र 15 से 20% सामान्य पेट्रोल होता है। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 48 रिटेल आउटलेट्स के साथ इसकी शुरुआत कर दी है।

    • शुरुआती फेज: पहले चरण में दिल्ली-NCR, मुंबई, पुणे और नागपुर कॉरिडोर के लगभग 50 पेट्रोल पंपों पर यह उपलब्ध होगा।
    • भविष्य का लक्ष्य: सरकार की योजना दिसंबर 2026 तक ऐसे स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 500 और दिसंबर 2027 तक पूरे देश में 5,000 करने की है।

    …लेकिन एक बड़ा ‘कैच’ है! (क्या आपकी गाड़ी में यह चलेगा?)

    ₹20 सस्ता होने के बावजूद, आप तुरंत अपनी सामान्य कार या बाइक में इसे नहीं भरवा सकते। E85 पेट्रोल सामान्य (E20 अनुकूल) गाड़ियों के लिए बिल्कुल नहीं है। यह ईंधन विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles – FFVs) के लिए है, जिनके इंजन 100% पेट्रोल से लेकर 85% या उससे अधिक इथेनॉल पर चलने के लिए खास तौर पर डिजाइन किए जाते हैं। वर्तमान में भारतीय बाजार में इसके अनुकूल केवल कुछ ही वाहन मौजूद या लॉन्च के करीब हैं:

    • टू-व्हीलर: हीरो मोटोकॉर्प की हाल ही में लॉन्च हुई Splendor+ Flex Fuel और HF Deluxe Flex Fuel, तथा सुजुकी की Gixxer SF 250 FFV
    • फोर-व्हीलर: मारुति सुजुकी की WagonR Flex Fuel (जो जल्द ही बड़े पैमाने पर लॉन्च होने वाली है)।
    • माइलेज पर असर: इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (Energy Density) पेट्रोल से कम होता है, इसलिए E85 गाड़ियों का माइलेज सामान्य गाड़ियों से 25-35% कम हो सकता है।

    देश, सरकार और किसानों को 3 बड़े फायदे

    ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में इथेनॉल भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है:

    1. भारी विदेशी मुद्रा की बचत: भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। सरकार के अनुसार, पिछले 10 सालों में इथेनॉल ब्लेंडिंग की बदौलत देश ने ₹1.84 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है।
    2. किसानों को सीधा लाभ: इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses), मक्का और खराब हो चुके अधिशेष अनाज से बनता है। इससे चीनी मिलों की माली हालत सुधरी है और किसानों को उनकी फसल का बेहतर और समय पर दाम मिल रहा है।
    3. पर्यावरण को राहत: पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे शहरों में प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी।
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