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    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के खिलाफ SC में PIL, याचिका में की गईं ये प्रमुख मांगें

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर अचानक उभरे डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। एडवोकेट राजा चौधरी द्वारा दायर इस याचिका में इस स्व-घोषित व्यंग्यात्मक संगठन की गतिविधियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

    याचिका में लीगल एक्शन को लेकर की गई प्रमुख मांगें

    सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित कानूनी कदम उठाने की मांग की गई है:

    • CBI जांच की मांग: याचिका में मांग की गई है कि कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों और इसके पीछे सक्रिय संदिग्ध या कथित ‘फर्जी वकीलों’ (Fake Advocates) की स्वतंत्र जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
    • अदालती टिप्पणियों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक: याचिकाकर्ता का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों को सिलेक्टिव तरीके से क्लिप करके, उन्हें संदर्भ से बाहर निकालकर सोशल मीडिया पर वायरल मीम्स, ब्रांडिंग और व्यावसायिक लाभ (Commercial Monetisation) के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर तत्काल कानूनी रोक लगाई जाए।
    • ट्रेडमार्क पंजीकरण पर कार्रवाई: सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स जुटाने के बाद इस नाम से कई ट्रेडमार्क एप्लिकेशन दाखिल किए गए हैं। याचिका में अदालती विवादों को इस तरह डिजिटल प्रॉपर्टी या राजनीतिक ब्रांडिंग में बदलने वाले तत्वों के खिलाफ सक्षम प्राधिकारियों को जांच के निर्देश देने की मांग की गई है।
    • फर्जी वकीलों पर एक्शन: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बयानों का हवाला देते हुए याचिका में जाली डिग्रियों के सहारे कानूनी पेशे में घुस आए फर्जी वकीलों और उनके नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    याचिकाकर्ता का तर्क: “यह याचिका वैध आलोचना, लोकतांत्रिक असंतोष या संविधान के दायरे में मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी (Article 19(1)(a)) को दबाने के लिए नहीं है। यह संवैधानिक प्रक्रियाओं और अदालती गरिमा के इस तरह हो रहे खतरनाक वस्तुकरण (Commodification) और सुनियोजित व्यावसायिक दोहन के खिलाफ है।”

    क्या है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)?

    यह कोई पंजीकृत या औपचारिक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक इंटरनेट-आधारित ‘ऑनलाइन पैरोडी मूवमेंट’ है। इसकी शुरुआत तब हुई जब मई 2026 के मध्य में एक सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कथित तौर पर सोशल मीडिया एक्टिविज्म करने वाले कुछ तत्वों या फर्जी डिग्रियों वाले वकीलों की तुलना ‘कॉकरोच और परजीवी’ से कर दी थी (हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया में उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया)।

    इस टिप्पणी के विरोध में राजनीतिक रणनीतिकार और बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत दिपके ने 16 मई को इस व्यंग्यात्मक अभियान की शुरुआत की। देखते ही देखते यह आंदोलन देश के बेरोजगार युवाओं, पेपर लीक और महंगाई से परेशान छात्रों के बीच एक बड़ा जरिया बन गया। इस संगठन का मज़ाकिया घोषणापत्र और सोशल मीडिया हैंडल युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुए, जिसके बाद इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा ने इसे देश को अस्थिर करने वाला एक विदेशी इन्फ्लुएंस ऑपरेशन बताया है, जबकि अब यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है।

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