कोविड-19 महामारी और सीमा सुरक्षा कारणों से पिछले छह वर्षों से ठप पड़े भारत के दो अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमा व्यापार मार्गों को लेकर बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। जहां एक ओर भारत-म्यांमार सीमा पर आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौटने वाली हैं, वहीं दूसरी ओर भारत-चीन (तिब्बत) सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे के व्यापार को लेकर ड्रैगन ने भारत को ‘इंतजार’ करने को कहा है।
1. भारत-म्यांमार सीमा व्यापार: 20 जुलाई से खुलेगा पैंगसाऊ दर्रा
अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में स्थित ऐतिहासिक पैंगसाऊ दर्रा (Pangsau Pass) आगामी 20 जुलाई 2026 से व्यापार के लिए दोबारा खुलने जा रहा है। महामारी के चलते 3 फरवरी 2020 को बंद किए गए इस ट्रेड लिंक को बहाल करने का निर्णय 9 जुलाई को स्थानीय व्यापार निकायों और म्यांमार के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक द्विपक्षीय बैठक में लिया गया।
- बॉर्डर हाट की व्यवस्था: यह सीमा व्यापार ‘बॉर्डर हाट’ के माध्यम से संचालित होगा, जो हर महीने की 10, 20 और 30 तारीख को खुलेगी।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट: इस बहाली से सीमा के दोनों ओर रहने वाले छोटे व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की खोई हुई आजीविका वापस लौटेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।
2. लिपुलेख दर्रा: बुनियादी ढांचे के नाम पर चीन का ‘होल्ड’
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) के माध्यम से होने वाला भारत-चीन सीमा व्यापार 6 साल बाद 1 जून 2026 को आधिकारिक रूप से खोल तो दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसके पीछे चीनी प्रशासन की ओर से आया एक संदेश मुख्य वजह है।
- चीनी पक्ष का तर्क (तकलाकोट में निर्माण): भारतीय व्यापारियों का जत्था 8 जुलाई को दर्रा पार करने के लिए पूरी तरह तैयार था। सामान को गुंजी गोदामों में सुरक्षित रख लिया गया था। हालांकि, ठीक एक दिन पहले 7 जुलाई को चीनी अधिकारियों ने भारतीय व्यापार अधिकारी (SDM धारचूला) को ईमेल भेजकर सूचित किया कि तिब्बत के तकलाकोट में नया मार्केटप्लेस और वेयरहाउस (गोदाम) अभी निर्माणाधीन हैं। चीन ने काम पूरा होने तक भारतीय व्यापारियों को न भेजने का अनुरोध किया है।
- खच्चरों की जगह अब सड़क मार्ग: इस साल के व्यापार की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि 2020 में धारचूला-लिपुलेख सड़क का निर्माण पूरा होने के कारण, व्यापारियों को अब पारंपरिक रूप से खच्चरों और घोड़ों पर सामान नहीं लादना था, बल्कि वे सीधे गाड़ियों से सामान लिपुलेख तक पहुंचा सकते थे।


