प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अप्रैल 2026 को उद्घाटित किए गए देश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे’ को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 12,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत (संपूर्ण परियोजना लागत लगभग 31,000 करोड़ रुपये) से बने इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर पहली ही मानसूनी बारिश ने निर्माण गुणवत्ता की पोल खोल दी है। महज 3 महीने (लगभग 79 दिन) के भीतर एक्सप्रेस-वे के कई हिस्सों में सड़क धंसने, गहरे गड्ढे होने और दरारें आने की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। इसे देखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसने अपनी तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
SIT का गठन क्यों किया गया?
एक्सप्रेस-वे की बदहाली और सड़क पर बने खतरनाक गड्ढों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन गड्ढों की वजह से कई तेज रफ्तार वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचे और कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। शुरुआत में एनएचएआई ने इन खामियों को बारिश और जलभराव का कारण बताकर टालने की कोशिश की, लेकिन हालात की गंभीरता और जनता के आक्रोश को देखते हुए एनएचएआई ने व्यापक तकनीकी ऑडिट कराने के लिए SIT गठित की।
इस SIT में एक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट एजेंसी, एनएचएआई के वरिष्ठ अभियंता, एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता और प्राधिकरण के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह दल दिल्ली से लेकर देहरादून तक कुल 23 संवेदनशील जगहों को चिह्नित कर वहां से कोर-कटिंग (सड़क के सैंपल्स काटना) के जरिए नमूने ले रहा है। जांच टीम रात के समय काम कर रही है ताकि यातायात प्रभावित न हो। एसआईटी को दो महीने के भीतर सड़क की तीनों लाइनों (किनारे, मध्य और बीच की पट्टी) की परतों, प्रयुक्त सामग्री और अन्य तकनीकी मानकों की जांच कर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है।
कहां और कितने गंभीर हैं हालात?
- शामली जिला (उत्तर प्रदेश): एक्सप्रेस-वे का सबसे गंभीर और डरावना मंजर शामली के बाबूरी क्षेत्र के पास देखने को मिला, जहां एनएच-709 और पानीपत-खतीमा हाईवे के क्रॉसिंग के पास बने रैंप की सीमेंट की दीवारें ढह गईं और भारी कटाव के बाद सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया।
- बागपत (गांगनौली-नांगल गांव): बागपत के पास एक्सप्रेस-वे के किनारों पर बड़े पैमाने पर मिट्टी का कटान (Soil Erosion) हुआ है, जिससे रेलिंग तक तिरछी हो गई है। मवीकलां के पास भी सड़क धंसने की शिकायतें आई हैं, जहां से एसआईटी ने सबसे पहले सैंपल लिए हैं।
- सहारनपुर और सर्विस लेन: सहारनपुर क्षेत्र में कई जगहों पर मिट्टी ढहने से एक्सप्रेस-वे के मुख्य कैरिजवे को खतरा पैदा हो गया है। बुटराडा की ओर जाने वाली सर्विस लेन का डामर बह गया है, और जलभराव के कारण अंडरपास के आसपास की नींव कमजोर हो रही है।
कड़े एक्शन और राजनीतिक विवाद
लापरवाही के प्राथमिक सबूत मिलने पर एनएचएआई ने मेरठ की निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेंद्र कुमार और चैतन्य कंसल्टेंसी के टीम लीडर कुलदीप राजदान को तत्काल पद से हटा दिया है। साथ ही कई वरिष्ठ इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दूसरी तरफ, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों का आरोप है कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण में जल्दबाजी की गई और बिना उचित गुणवत्ता जांच के इसका उद्घाटन कर दिया गया, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ गई है।


