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    लेफ्ट के आखिरी गढ़ में भी सेंध, कांग्रेस के हाथ आया एकमात्र राज्य

    केरल की राजनीति में आज एक बड़ा ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। ‘ईश्वर के अपने देश’ (God’s Own Country) कहे जाने वाले इस राज्य में वामपंथ का आखिरी किला ढहता नजर आ रहा है। 4 मई 2026 को हो रही मतगणना के रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) को करारी शिकस्त दी है।

    केरल रुझान: एक नजर में (दोपहर 12:00 बजे तक)

    गठबंधनसीटें (कुल 140)स्थिति
    UDF (कांग्रेस गठबंधन)101बहुमत से काफी आगे
    LDF (वामपंथी गठबंधन)38भारी गिरावट
    NDA (भाजपा गठबंधन)01बढ़त बरकरार

    मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के गढ़ में सेंध

    ​इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर खुद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सीट पर देखने को मिला है। अपने पारंपरिक गढ़ धर्मडम में मुख्यमंत्री शुरुआती राउंड के बाद से ही पीछे चल रहे हैं। विजयन के अलावा उनके मंत्रिमंडल के करीब 14 मंत्री भी अपनी-अपनी सीटों पर पिछड़ रहे हैं, जो एलडीएफ सरकार के प्रति भारी सत्ता-विरोधी लहर (Anti-incumbency) का संकेत है।

    कांग्रेस की दक्षिण में मजबूती

    ​कर्नाटक और तेलंगाना के बाद अब केरल में भी कांग्रेस की वापसी ने दक्षिण भारत में पार्टी की स्थिति को अभूतपूर्व मजबूती दी है। वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में विपक्ष ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा, जिसका असर नतीजों में साफ दिख रहा है। वायनाड और इडुक्की जैसे जिलों में तो यूडीएफ ने क्लीन स्वीप की स्थिति बना ली है।

    वामपंथ के लिए अस्तित्व का संकट

    ​केरल पिछले कई दशकों से वामपंथ का सबसे मजबूत आधार रहा है। 2021 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर विजयन ने इतिहास रचा था, लेकिन 2026 के ये रुझान बताते हैं कि जनता ने ‘बदलाव’ को चुना है। यदि ये रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं, तो भारत की संसदीय राजनीति में लेफ्ट के पास किसी भी राज्य की सत्ता नहीं रहेगी।

    तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है, जबकि माकपा (CPI-M) के कार्यालयों पर सन्नाटा पसरा है। मतगणना के अगले कुछ घंटे औपचारिक मोहर लगा देंगे।

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