पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मई 2026 का दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। जनसंघ के संस्थापक और भाजपा के ‘पितामह’ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पर पहली बार ‘कमल’ पूर्ण बहुमत के साथ खिलता नजर आ रहा है। दोपहर 12:30 बजे तक के रुझानों में भाजपा 180 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर ममता बनर्जी के 15 साल पुराने अभेद्य किले को ध्वस्त कर चुकी है।
डॉ. मुखर्जी ने जिस ‘एकात्म मानववाद’ और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखी थी, उसका राजनीतिक फल आज भाजपा को मिलता दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल को न केवल एक चुनावी राज्य, बल्कि अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था।
जीत के 4 मुख्य स्तंभ:
- ‘सोनार बांग्ला’ बनाम ‘भ्रष्टाचार’: पीएम मोदी ने अपनी रैलियों में स्थानीय भ्रष्टाचार, संदेशखाली जैसी घटनाओं और ‘कट मनी’ के मुद्दों को सीधे जनता से जोड़ा। उन्होंने एक ‘विकसित बंगाल’ का खाका खींचा जो युवाओं को रास आया।
- अमित शाह की ‘बूथ-लेवल’ व्यूहरचना: अमित शाह ने ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल को बंगाल के सुदूर गांवों तक पहुँचाया। मतुआ समुदाय और राजबंशी जैसे निर्णायक वोट बैंक को साधने के लिए शाह ने खुद जमीन पर कमान संभाली।
- हिंदुत्व और बंगाली अस्मिता का मेल: भाजपा ने इस बार ‘बहिरागत’ (बाहरी) के टैग को प्रभावी ढंग से काटा। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की विरासत को अपनी रैलियों का केंद्र बनाया, जिससे यह साबित हुआ कि भाजपा की जड़ें बंगाल की मिट्टी में ही हैं।
- महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था: संदेशखाली की गूंज ने महिला मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को TMC से दूर कर दिया। भाजपा ने इसे अस्मिता और सुरक्षा की लड़ाई बनाकर पेश किया।
ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन
रुझानों के अनुसार, भाजपा न केवल उत्तर बंगाल और जंगलमहल में मजबूत हुई है, बल्कि दक्षिण बंगाल के उन क्षेत्रों में भी सेंध लगाई है जो कभी ममता बनर्जी के सबसे मजबूत गढ़ थे। भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी की बढ़त और कोलकाता की शहरी सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि बंगाल ने इस बार ‘चुपचाप कमल छाप’ की रणनीति पर मुहर लगा दी है।
2026 के ये नतीजे भाजपा के लिए महज एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि उस वैचारिक यात्रा का समापन हैं जो डॉ. मुखर्जी ने दशकों पहले शुरू की थी। आज मोदी-शाह की जोड़ी ने बंगाल में ‘परिवर्तन’ के वादे को हकीकत में बदल दिया है।


