पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में हुए ऐतिहासिक 92.6% मतदान की गूँज अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुँच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल इस भारी मतदान प्रतिशत पर संतोष व्यक्त किया है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर अहम टिप्पणी भी की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बंगाल में हुए भारी मतदान को लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया। CJI ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का घरों से निकलकर वोट डालना यह दर्शाता है कि आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर अटूट विश्वास है। कोर्ट ने इसे चुनाव आयोग और मतदाताओं की सामूहिक सफलता करार दिया।
चुनाव कर्मियों के नाम हटने का विवाद
अदालत एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि बंगाल में हजारों चुनाव कर्मियों (Polling Staff) के नाम वोटर लिस्ट से जानबूझकर काट दिए गए हैं, ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग न कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट का रुख:
- हस्तक्षेप से इनकार: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। अदालत ने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया अपने बीच के चरण में हो, तो कोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
- चुनाव आयोग पर भरोसा: CJI ने टिप्पणी की कि मतदाता सूची का प्रबंधन और चुनाव सुचारू रूप से संपन्न कराना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारी है। यदि किसी को शिकायत है, तो वे चुनाव संपन्न होने के बाद उचित कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
- तथ्यों की कमी: अदालत ने यह भी पाया कि याचिका में लगाए गए आरोप व्यापक और सामान्य थे, उनके समर्थन में पर्याप्त ठोस सबूत पेश नहीं किए गए थे।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
| प्रथम चरण मतदान | 92.6% (ऐतिहासिक रिकॉर्ड) |
| मुख्य मुद्दा | चुनाव कर्मियों के नाम वोटर लिस्ट से गायब होना |
| SC का फैसला | प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं, चुनाव आयोग का क्षेत्राधिकार |
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है और विपक्ष के उन दावों को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है जिनमें चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे थे। 92% से अधिक मतदान ने बंगाल के चुनावी दंगल को और भी रोमांचक बना दिया है, जिसकी चर्चा अब न्यायपालिका के गलियारों तक हो रही है।


