एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के विभाजन को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। ओवैसी ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए सीधा तर्क दिया है कि देश के बंटवारे के लिए मुसलमान जिम्मेदार नहीं थे। उन्होंने इस ऐतिहासिक त्रासदी के लिए तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच की राजनीति को मुख्य कारण बताया है।
ओवैसी का तर्क: विभाजन के लिए कौन जिम्मेदार?
एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि अक्सर विभाजन का दोष भारतीय मुसलमानों पर मढ़ा जाता है, जो पूरी तरह से गलत और ऐतिहासिक रूप से आधारहीन है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि बंटवारे का फैसला कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने लिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उस समय के बड़े नेताओं के पास विभाजन को रोकने का अवसर था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया।
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव सावरकर और जिन्ना ने रखी थी, न कि आम मुसलमान ने। उन्होंने कहा कि जो मुसलमान भारत में रह गए, उन्होंने जिन्ना के विचार को खारिज कर दिया था। ओवैसी ने एक तकनीकी तर्क देते हुए कहा कि 1946 के चुनावों में, जिसने विभाजन की नींव रखी, केवल 10% से 15% मुसलमानों को ही वोट देने का अधिकार था (संपत्ति और शिक्षा के आधार पर)। इसलिए, पूरे मुस्लिम समुदाय को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है।
“जिन्ना के पैरोकार नहीं थे आम मुसलमान”
ओवैसी ने जिन्ना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मुसलमानों ने हमेशा इस मिट्टी को अपना माना है। उन्होंने कहा, बंटवारे के समय करोड़ों मुसलमानों ने पाकिस्तान जाने के बजाय भारत में रहने का विकल्प चुना, क्योंकि वे इस देश की साझा संस्कृति और परंपरा में विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा कि जिन्ना की जिद और कांग्रेस की विफलता ने मिलकर देश का नक्शा बदला। आम गरीब मुसलमान को इस राजनीति की कोई समझ नहीं थी और न ही उसकी इसमें कोई भूमिका थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और निहितार्थ
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में इतिहास के पुनर्लेखन और विभाजन की विभीषिका पर चर्चा गरम है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें इतिहास के लिए दोषी महसूस करने की जरूरत नहीं है। भारतीय जनता पार्टी अक्सर ओवैसी के बयानों को ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देखती है। ओवैसी ने अंत में कहा कि आज के मुसलमानों से 1947 की गलतियों का हिसाब मांगना बंद होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने भारत को अपना घर चुनकर अपनी देशभक्ति पहले ही साबित कर दी है।


