ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी अस्थिरता के बीच खाड़ी देशों ने एक क्रांतिकारी वैकल्पिक मार्ग खोजने की तैयारी कर ली है। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा भारतीय दिग्गज गौतम अडानी को मिलने की उम्मीद है।
होर्मुज संकट और खाड़ी देशों का मास्टर प्लान
ईरान ने बार-बार दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन, ‘होर्मुज स्ट्रैट’ को बंद करने की धमकी दी है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है। इस जोखिम को खत्म करने के लिए सऊदी अरब, यूएई (UAE) और जॉर्डन मिलकर एक नई पाइपलाइन परियोजना पर विचार कर रहे हैं।
- नया मार्ग: यह प्रस्तावित पाइपलाइन खाड़ी देशों के तेल क्षेत्रों से शुरू होकर सऊदी अरब और जॉर्डन के रास्ते सीधे इजरायल के हाइफा पोर्ट (Haifa Port) तक जाएगी।
- उद्देश्य: इस मार्ग के जरिए तेल को समुद्री रास्ते के बजाय जमीन के रास्ते सीधे भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) तक पहुँचाया जा सकेगा, जिससे होर्मुज स्ट्रैट और ईरान के खतरे को पूरी तरह बायपास किया जा सकेगा।
अडानी की ‘बल्ले-बल्ले’: क्यों होगा फायदा?
इस पूरी योजना के केंद्र में इजरायल का हाइफा पोर्ट है, जिसका स्वामित्व और संचालन अडानी ग्रुप के पास है।
- रणनीतिक केंद्र: यदि खाड़ी देशों का तेल पाइपलाइन के जरिए हाइफा पहुँचता है, तो यह बंदरगाह दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा हब में बदल जाएगा।
- भारी राजस्व: तेल के भंडारण, लोडिंग और लॉजिस्टिक्स के जरिए अडानी ग्रुप को अरबों डॉलर का राजस्व मिल सकता है।
- वैश्विक कद: यह परियोजना अडानी ग्रुप को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के एक अनिवार्य खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर देगी।
IMEC कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती
यह पाइपलाइन प्रोजेक्ट भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का एक हिस्सा या उसका पूरक हो सकता है।
- समय की बचत: स्वेज नहर या होर्मुज स्ट्रैट के चक्कर काटने के बजाय, यह सीधा मार्ग यूरोप तक तेल पहुँचाने के समय को 40% तक कम कर सकता है।
- सुरक्षा: रेड सी (लाल सागर) में हूतियों के हमलों से बचने के लिए भी यह एक सुरक्षित जमीनी विकल्प साबित होगा।
चुनौतियां और कूटनीति
हालांकि यह योजना आर्थिक रूप से शानदार है, लेकिन इसके पीछे की कूटनीति जटिल है। इस पाइपलाइन के सफल होने के लिए सऊदी अरब और इजरायल के बीच औपचारिक संबंधों का होना अनिवार्य है। ईरान इस पाइपलाइन को अपनी रणनीतिक पकड़ (होर्मुज पर नियंत्रण) के लिए सीधा खतरा मानेगा। यदि यह पाइपलाइन हकीकत बनती है, तो यह न केवल मध्य पूर्व का भूगोल बदल देगी। 2026 के इस दौर में, जहाँ युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, यह “हाइफा कॉरिडोर” दुनिया के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है।


