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    नक्सलवाद खात्मे की कगार पर, अर्बन नेटवर्क ध्वस्त, जानें 10 साल में कैसे बदला माहौल

    भारत में आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी देखने को मिल रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में नक्सलवाद अपने खात्मे के कगार पर पहुँच गया है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और विकास कार्यों के समन्वय ने माओवादी विचारधारा को हाशिए पर धकेल दिया है।


    नक्सलवाद के ग्राफ में भारी गिरावट

    पिछले 10 वर्षों (2016-2026) के आंकड़े बताते हैं कि नक्सली हिंसा और उनके प्रभाव क्षेत्र में अभूतपूर्व कमी आई है:

    • बड़ा आत्मसमर्पण: पिछले दस वर्षों में 10,000 से अधिक माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है। अकेले 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों से 1,200 नक्सलियों ने सरेंडर किया।
    • हिंसा में कमी: नक्सली हिंसा की घटनाओं में 72% की कमी दर्ज की गई है, जबकि सुरक्षा बलों और नागरिकों की मृत्यु दर में भी 85% तक की गिरावट आई है।
    • सिकुड़ता भूगोल: एक समय देश के 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, जो अब घटकर केवल 38 जिलों तक सीमित रह गए हैं। इनमें से भी केवल 10-12 जिलों में ही सक्रिय प्रभाव बचा है।

    ‘अर्बन नक्सल’ नेटवर्क पर नकेल

    रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि सरकार ने केवल जंगलों में ही नहीं, बल्कि शहरों में बैठे उनके समर्थक तंत्र जिसे ‘अर्बन नक्सल’ कहा जाता है, उस पर भी शिकंजा कसा है।

    • फंडिंग पर रोक: माओवादियों के वित्तीय स्रोतों और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए NIA और ED ने व्यापक कार्रवाई की है।
    • वैचारिक नेटवर्क: शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की आड़ में माओवादी विचारधारा फैलाने वाले संदिग्ध नेटवर्क की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई तेज की गई है।

    रणनीति के तीन स्तंभ: ‘SAMADHAN’

    सरकार की इस सफलता के पीछे तीन मुख्य रणनीतियां रही हैं:

    1. आक्रामक सैन्य अभियान: ‘ऑपरेशन प्रहार’ और ‘कगार’ के जरिए नक्सलियों के गढ़ (जैसे अबूझमाड़) में सुरक्षा बलों की स्थायी चौकियां स्थापित की गई हैं।
    2. विकास का प्रवेश: जिन इलाकों में सड़क नहीं थी, वहाँ 12,000 किमी से अधिक सड़कों का निर्माण और हजारों मोबाइल टावर लगाए गए हैं।
    3. पुनर्वास नीति: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नकद सहायता, घर और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे निचले स्तर के कैडर में संगठन छोड़ने की होड़ मची है।

    गृह मंत्री ने हालिया बयान में विश्वास जताया है कि मार्च 2027 तक भारत पूरी तरह से नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा। वर्तमान में सुरक्षा बल उन अंतिम पॉकेट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहाँ माओवादी शीर्ष नेतृत्व छिपा हो सकता है।

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