पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष अब अपने चौथे हफ्ते (26वें दिन) में प्रवेश कर चुका है और स्थिति पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गई है। अमेरिका ने ईरान को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वह शांति प्रस्ताव स्वीकार नहीं करता है, तो उसे अब तक के सबसे भीषण सैन्य हमले का सामना करना पड़ेगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति के पक्षधर हैं, लेकिन वे “धमकी” नहीं देते। उन्होंने कहा, यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका उस पर ऐसा हमला करेगा जैसा उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया होगा।
- सैन्य हार का दावा: ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमता और एयर डिफेंस सिस्टम काफी हद तक तबाह हो चुके हैं। अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों (Energy Infrastructure) को निशाना बनाने के लिए 4 दिन की समयसीमा दी है।
युद्धविराम पर तनातनी (15-सूत्रीय बनाम 5-सूत्रीय प्रस्ताव)
शांति वार्ता को लेकर दोनों देशों के बीच भारी गतिरोध बना हुआ है:
- अमेरिका का प्रस्ताव (15-Point Plan): पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव में ईरान से अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करने, यूरेनियम भंडार सौंपने, मिसाइल क्षमता सीमित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग की गई है।
- ईरान का पलटवार (5-Point Counterproposal): ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को “अत्यधिक” बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरान ने अपनी शर्तें रखी हैं, जिनमें युद्ध का हर्जाना (War Reparations), हत्याओं और आक्रमण पर तुरंत रोक, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण संप्रभुता शामिल है।
युद्ध के मैदान की स्थिति
- सैन्य तैनाती: तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपनी 82nd एयरबोर्न डिवीजन के 1,000 अतिरिक्त सैनिकों और मरीन यूनिट्स को क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है।
- ताजा हमले: इजरायली वायुसेना ने तेहरान और मशहद (Mashhad) के पास स्थित सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं। वहीं, ईरान समर्थित समूहों ने इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले जारी रखे हैं।
जहाँ एक ओर कूटनीतिक रास्ते (पाकिस्तान और चीन के माध्यम से) तलाशे जा रहे हैं, वहीं दोनों पक्षों के सख्त रुख ने इस क्षेत्र को एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध (Full-scale Regional War) के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।


