ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजे वैश्विक तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान के भीतर भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने देश के प्रमुख शिया मौलवियों और विद्वानों के साथ एक आपातकालीन बैठक की है।
बैठक का मुख्य एजेंडा: हिंसा और आंतरिक सुरक्षा
ईरान में खामेनेई के निधन के बाद पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर कराची और पाराचिनार में भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जनरल मुनीर इस हिंसा को लेकर काफी ‘नाराज’ दिखे और उन्होंने शिया नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया:
- हिंसा पर सख्त रुख: जनरल मुनीर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान किसी भी विदेशी घटना (ईरान संकट) के आधार पर अपने देश के भीतर अराजकता बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने मौलवियों से अपने समर्थकों को शांत रखने की अपील की।
- सांप्रदायिक सौहार्द: पाकिस्तान में सुन्नी-शिया तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए सेना प्रमुख ने ‘मदरसे’ और धार्मिक संस्थानों को राजनीति से दूर रहने की चेतावनी दी।
- सुरक्षा चिंताएं: मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान पहले ही आर्थिक और सीमा सुरक्षा (TTP और बलूच उग्रवाद) की चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में आंतरिक दंगों से देश की नींव कमजोर होगी।
ईरान-इजरायल युद्ध का असर
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान का एक बड़ा वर्ग ईरान के प्रति सहानुभूति रखता है। जनरल मुनीर को डर है कि यदि ईरान पर बड़ा हमला होता है, तो पाकिस्तान में मौजूद ‘ईरान समर्थित’ गुट सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
मौलवियों की प्रतिक्रिया
बैठक में मौजूद शिया विद्वानों ने शांति बनाए रखने का आश्वासन तो दिया, लेकिन उन्होंने सरकार से अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा की मांग भी की। उन्होंने शिकायत की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है, जिससे युवाओं में गुस्सा है।
जनरल असीम मुनीर की यह सक्रियता दर्शाती है कि पाकिस्तान की ‘एस्टेब्लिशमेंट’ (सेना) को इस बात का पूरा एहसास है कि मध्य-पूर्व की आग पाकिस्तान के घर तक पहुँच सकती है। ईरान में सत्ता परिवर्तन और युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।


