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    एपल में नए युग की शुरुआत, ऐसा रहा नए CEO जॉन टर्नस का सफर

    एपल (Apple) के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हो गई है। दिग्गज टेक कंपनी ने जॉन टर्नस (John Ternus) को अपना नया सीईओ (CEO) नियुक्त किया है। टिम कुक के उत्तराधिकारी के रूप में टर्नस का चयन न केवल उनकी प्रशासनिक क्षमता, बल्कि हार्डवेयर इंजीनियरिंग में उनके ‘जादुई’ विजन का प्रमाण है।

    कौन हैं जॉन टर्नस?

    जॉन टर्नस एपल के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में से एक रहे हैं। वे 2001 में एपल की हार्डवेयर इंजीनियरिंग टीम में शामिल हुए थे। उस समय कंपनी अपनी पहचान दोबारा बनाने की कोशिश कर रही थी। टर्नस ने अपनी मेहनत और तकनीकी सूझबूझ से सीढ़ियां चढ़ीं और 2021 में वे हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने।

    ‘मशीनों के जादूगर’ का सफर

    टर्नस को हार्डवेयर की दुनिया में ‘मशीनों का जादूगर’ कहा जाता है। उन्होंने एपल के कई क्रांतिकारी उत्पादों को धरातल पर उतारने में मुख्य भूमिका निभाई है:

    • मैक (Mac) का पुनर्जन्म: टर्नस ने इंटेल चिप्स से एपल के अपने ‘M-Series Silicon’ चिप्स में बदलाव का नेतृत्व किया। यह एपल के इतिहास का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव था, जिसने मैक डिवाइसेस की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ को पूरी तरह बदल दिया।
    • आईफोन और आईपैड: आईफोन की लगभग हर नई जनरेशन और आईपैड के स्लिम डिजाइन (विशेषकर हालिया आईपैड प्रो) के पीछे टर्नस की इंजीनियरिंग टीम का हाथ रहा है।
    • एपल वॉच और एयरपॉड्स: इन वियरेबल डिवाइसेस को ग्लोबल मार्केट लीडर बनाने में उनकी इंजीनियरिंग डिजाइनिंग का बड़ा योगदान है।

    जॉन टर्नस ही क्यों?

    एपल के बोर्ड और टिम कुक ने टर्नस पर भरोसा जताने के पीछे कई ठोस कारण देखे:

    1. टीम वर्क और व्यवहार: टर्नस को कंपनी के भीतर एक बहुत ही मिलनसार और सुलझा हुआ व्यक्तित्व माना जाता है। टिम कुक की तरह वे भी विवादों से दूर रहते हैं और टीम को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।
    2. तकनीकी विशेषज्ञता: टिम कुक का बैकग्राउंड ‘ऑपरेशंस और सप्लाई चेन’ का था, लेकिन टर्नस एक शुद्ध इंजीनियर हैं। कंपनी अब एक ऐसे दौर में है जहाँ उसे AI और हार्डवेयर के सटीक तालमेल की जरूरत है, जिसमें टर्नस माहिर हैं।
    3. एपल की संस्कृति की समझ: 20 से अधिक वर्षों तक स्टीव जॉब्स और टिम कुक के साथ काम करने के कारण वे एपल की ‘गोपनीयता और परफेक्शन’ वाली संस्कृति को गहराई से समझते हैं।

    भविष्य की चुनौतियाँ

    सीईओ के तौर पर टर्नस के सामने कुछ बड़ी चुनौतियाँ भी हैं:

    • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को टक्कर देने के लिए एपल के हार्डवेयर में AI को कैसे एकीकृत किया जाए, यह उनकी प्राथमिकता होगी।
    • चीन से निर्भरता कम करना: भारत और वियतनाम जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग हब को मजबूत करना।
    • विजन प्रो: एपल के नए ‘स्पेशल कंप्यूटर’ विजन प्रो को मुख्यधारा (Mainstream) का उत्पाद बनाना।

    जॉन टर्नस का सीईओ बनना इस बात का संकेत है कि एपल भविष्य में अपने हार्डवेयर नवाचार (Innovation) को और भी आक्रामक रूप से आगे बढ़ाएगा। ‘मशीनों का यह जादूगर’ अब केवल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी की तकदीर गढ़ने के लिए तैयार है।

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