आमिर खान के बेटे जुनैद खान और दक्षिण भारतीय सिनेमा की स्टार साई पल्लवी की फिल्म ‘एक दिन’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। इस फिल्म का दर्शकों को लंबे समय से इंतजार था, खासकर जुनैद के डेब्यू और साई पल्लवी के साथ उनकी केमिस्ट्री को लेकर। आइए जानते हैं कैसी है यह फिल्म:
कहानी का ताना-बना
फिल्म की कहानी जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘एक दिन’ की घटनाओं पर आधारित है। यह दो अजनबियों की मुलाकात और उनके बीच पनपने वाले एक अनकहे रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। निर्देशक ने एक सादा और भावनात्मक कथानक चुनने की कोशिश की है, जो आज के शोर-शराबे वाले सिनेमा से हटकर ‘स्लो-बर्न’ रोमांस का अहसास कराता है।
अभिनय: साई पल्लवी की चमक और जुनैद का संयम
- साई पल्लवी: हमेशा की तरह साई पल्लवी फिल्म की जान हैं। उनकी सहजता और आंखों से संवाद करने की कला दर्शकों को बांधे रखती है। वह स्क्रीन पर एक ऐसी ऊर्जा लेकर आती हैं जो फिल्म के धीमेपन को भी झेलने लायक बनाती है।
- जुनैद खान: अपनी पहली फिल्म में जुनैद ने एक शांत और गंभीर किरदार निभाया है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है और वह अपने पिता की तरह बारीकियों पर ध्यान देते नजर आते हैं। हालांकि, कुछ भावुक दृश्यों में उनकी पकड़ अभी थोड़ी कच्ची लगती है, जिसे अनुभव के साथ सुधारा जा सकता है।
कहां रह गई कमी? (फिल्म के कमजोर पक्ष)
रिव्यू के अनुसार, फिल्म ‘खूबसूरत’ तो है लेकिन लॉजिक (तर्क) के मोर्चे पर कमजोर पड़ जाती है:
- धीमी रफ्तार: फिल्म की पेसिंग इतनी धीमी है कि कई बार दर्शक बोरियत महसूस करने लगते हैं। स्क्रीनप्ले को और थोड़ा कसा जा सकता था।
- तर्कहीन घटनाक्रम: फिल्म में कुछ मोड़ ऐसे आते हैं जो वास्तविकता से परे लगते हैं। अजनबियों के बीच इतना गहरा जुड़ाव महज चंद घंटों में दिखाना थोड़ा फिल्मी और अवास्तविक लगता है।
- क्लाइमेक्स: फिल्म का अंत सुंदर है, लेकिन यह हर किसी को संतुष्ट नहीं कर पाता। कुछ सवाल अनसुलझे रह जाते हैं जो दर्शकों को खटक सकते हैं।
तकनीकी पक्ष
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। लोकेशन और फ्रेमिंग फिल्म के मूड को बखूबी दर्शाती है। संगीत औसत है, जो कहानी के साथ चलता तो है लेकिन थिएटर से बाहर निकलने के बाद जुबां पर नहीं रहता।
‘एक दिन’ उन लोगों के लिए है जो शांत, सौम्य और बिना किसी मिर्च-मसाले वाली प्रेम कहानियां पसंद करते हैं। अगर आप साई पल्लवी के प्रशंसक हैं और जुनैद की शुरुआत देखना चाहते हैं, तो यह एक बार देखी जा सकती है। बस अपने साथ थोड़ा धैर्य लेकर थिएटर जाएं।


