भारतीय क्रिकेट के गलियारों में कुछ नाम प्रतिभा के दम पर चमकते हैं, तो कुछ अपनी किस्मत की वजह से। लेकिन संजू सैमसन एक ऐसा नाम है, जो ‘धैर्य’ और ‘साहस’ की एक मिसाल बनकर उभरे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 विश्व कप 2026 में संजू की धमाकेदार वापसी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा को लंबे समय तक नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। संजू सैमसन की यह कहानी केवल रनों की नहीं, बल्कि उस मानसिक मजबूती की है जिसने उन्हें टूटने नहीं दिया।
संघर्ष का लंबा सफर
संजू सैमसन का अंतरराष्ट्रीय करियर किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। 2015 में डेब्यू करने के बाद से, उन्हें कभी भी टीम में लगातार मौके नहीं मिले।
एक मैच में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद अगले तीन मैचों के लिए बाहर कर दिया जाना संजू के लिए आम बात हो गई थी। ऋषभ पंत, ईशान किशन और केएल राहुल जैसे विकेटकीपर-बल्लेबाजों की मौजूदगी में संजू हमेशा ‘बैकअप’ विकल्प बनकर रह गए। कई बार उनके शॉट चयन पर सवाल उठाए गए, लेकिन संजू ने अपनी शैली नहीं बदली।
‘धैर्य’ जब बना हथियार
संजू की सबसे बड़ी ताकत उनका शांत स्वभाव रहा है। जब-जब उन्हें टीम से बाहर किया गया, उन्होंने सोशल मीडिया पर शिकायत करने के बजाय घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में पसीना बहाया। राजस्थान रॉयल्स के कप्तान के तौर पर उन्होंने अपनी परिपक्वता दिखाई, जिसने चयनकर्ताओं को उन्हें फिर से मौका देने पर मजबूर कर दिया। “संजू सैमसन के लिए टीम इंडिया का दरवाजा कभी बंद नहीं हुआ था, बस उन्हें एक ऐसी पारी की तलाश थी जो उनकी जगह पक्की कर सके।”
2026 की वो वापसी जिसने ‘तहलका’ मचा दिया
टी-20 विश्व कप 2026 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच संजू के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जब टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर लड़खड़ा गया था। उन्होंने 50 गेंद में 12 चौके और चार छक्के की मदद से नाबाद 97 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 194 का रहा। यह पारी केवल आंकड़ों के लिए नहीं थी, बल्कि उन आलोचकों को जवाब था जो उन्हें ‘असंगत’ (Inconsistent) कहते थे। संजू ने दिखाया कि वह एक भरोसेमंद फिनिशर और गेम-चेंजर दोनों की भूमिका निभा सकते हैं।
सफलता का मंत्र: साहस
संजू की सफलता के पीछे उनका वह साहस है जो उन्हें रिस्क लेने से नहीं रोकता। यही निडरता उन्हें आधुनिक टी-20 क्रिकेट का सबसे खतरनाक बल्लेबाज बनाती है। आज वह न केवल एक खिलाड़ी हैं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो असफलताओं से जल्दी हार मान लेते हैं।


