अमेरिकी वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) हावर्ड लुटनिक की हालिया भारत यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारों में काफी चर्चा बटोरी है। कभी भारत को “माफी मांगने” और “समझौते की टेबल पर आने” की चेतावनी देने वाले लुटनिक अब दिल्ली में काफी सहज और सकारात्मक नजर आ रहे हैं।
तेवर में बदलाव: “सॉरी” से “फ्रूटफुल लंच” तक
कुछ समय पहले तक हावर्ड लुटनिक अपने सख्त बयानों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव में भारत एक-दो महीने में “सॉरी” कहते हुए व्यापार समझौते के लिए गिड़गिड़ाएगा। गुरुवार को लुटनिक ने दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ एक खुशनुमा माहौल में लंच मीटिंग की।पीयूष गोयल और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें लुटनिक काफी “कूल” और मुस्कुराते हुए नजर आए। इसे “अत्यंत फलदायी” (very fruitful) चर्चा बताया गया है।
अचानक भारत यात्रा का कारण
लुटनिक की यह यात्रा अघोषित और अचानक थी। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।
- निजी कारण: वे जोधपुर में एक हाई-प्रोफाइल शादी (टेक एग्जीक्यूटिव निकेश अरोड़ा की बेटी की शादी) में शामिल होने के लिए भारत आए हैं।
- रणनीतिक अवसर: इसी बहाने उन्होंने पीयूष गोयल से मुलाकात कर अटकी हुई भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चर्चा की।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ‘टैरिफ झटका’
लुटनिक के नरम पड़ने के पीछे अमेरिका में हुआ एक बड़ा कानूनी बदलाव भी है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को “अवैध” ठहराते हुए रद्द कर दिया है। इससे ट्रंप प्रशासन का वह ‘लीवरेज’ (दबाव बनाने की शक्ति) कम हो गया है जिसका इस्तेमाल वे भारत जैसे देशों से अपनी शर्तें मनवाने के लिए कर रहे थे।
ट्रेड डील का भविष्य
भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) पर काम चल रहा है।
- नया लक्ष्य: दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
- टैरिफ में कटौती: प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर विचार कर रहा है।
- हावर्ड लुटनिक की दिल्ली यात्रा और उनके बदले हुए हाव-भाव यह संकेत देते हैं कि अमेरिका अब भारत के साथ व्यापारिक मुद्दों पर ‘दबाव’ के बजाय ‘सहयोग’ की नीति अपना रहा है। भारत के सख्त रुख और अमेरिकी अदालती फैसलों ने पासा पलट दिया है।


