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    500 की थी उम्मीद, 200 विमानों की हुई डील, ट्रंप-जिनपिंग में मुलाकात, ताइवान पर चीन सख्त

    अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद दावा किया है कि चीन 200 बोइंग जेट खरीदेगा। हालांकि, इस घोषणा के तुरंत बाद बोइंग के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

    सौदे का मुख्य विवरण

    ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में इस डील की पुष्टि करते हुए इसे “200 बड़े विमानों” का ऑर्डर बताया। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस सौदे से अमेरिका में बड़ी संख्या में नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस ऑर्डर में कौन से मॉडल शामिल हैं, लेकिन चर्चाओं में 737 मैक्स (737 MAX) और 787 ड्रीमलाइनर जैसे मॉडल शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। करीब एक दशक में यह पहली बार है जब चीन ने अमेरिका से वाणिज्यिक जेट खरीदने की बड़ी प्रतिबद्धता दिखाई है।


    शेयरों में 4% की गिरावट क्यों?

    उम्मीद के विपरीत, इस घोषणा के बाद न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बोइंग के शेयर 4.7% तक गिर गए। इस गिरावट के पीछे विशेषज्ञों ने निम्नलिखित कारण बताए हैं:

    1. बाजार की उम्मीदों से कम: वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों को उम्मीद थी कि यह सौदा 500 विमानों के आसपास होगा। 200 विमानों का आंकड़ा उम्मीद से काफी छोटा रहा।
    2. स्पष्टता का अभाव: ट्रंप के बयान में विमानों की डिलीवरी के समय और मॉडल्स को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई।
    3. अनिश्चित इतिहास: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अतीत में चीन के साथ हुए कई बड़े समझौते अंतिम अनुबंधों (contracts) में तब्दील नहीं हो पाए हैं, जिससे निवेशक सतर्क हैं।

    व्यापार संबंधों पर प्रभाव

    यह घोषणा ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान हुई है, जहां वे कई शीर्ष अमेरिकी सीईओ (जैसे बोइंग के केली ऑर्टबर्ग और जीई एयरोस्पेस के लैरी कल्प) के साथ पहुंचे हैं। यह सौदा दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक “सांकेतिक कदम” माना जा रहा है। हालांकि, बाजार अभी भी इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या यह “प्रतिबद्धता” वास्तव में एक ठोस व्यावसायिक सौदे में बदल पाएगी।

    शी जिनपिंग की सीधी चेतावनी

    राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों की सबसे “लाल रेखा” (Red Line) है। उन्होंने दोहराया कि चीन ताइवान की “स्वतंत्रता” की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे अपना अभिन्न अंग मानता है। जिनपिंग ने कहा कि यदि ताइवान के मुद्दे को सही ढंग से नहीं संभाला गया, तो दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव (Conflict) हो सकता है।

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