बॉबी देओल के 57वें जन्मदिन के अवसर पर उनके करियर के उतार-चढ़ाव और हालिया ब्लॉकबस्टर ‘एनिमल’ के जरिए मिली जबरदस्त सफलता की कहानी वाकई प्रेरणादायक है। 90 के दशक में ‘बरसात’, ‘गुप्त’ और ‘सोल्जर’ जैसी हिट फिल्मों के बाद बॉबी का करियर एक लंबे समय के लिए ढलान पर आ गया था, लेकिन उनकी वापसी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
क्रिकेट मैच जिसने बदली किस्मत
बॉबी देओल के करियर का टर्निंग पॉइंट तब आया जब उनकी मुलाकात एक ‘सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग’ (CCL) के दौरान सलमान खान से हुई।
- अंधेरे का दौर: उस समय बॉबी काम न मिलने के कारण डिप्रेशन और शराब की लत से जूझ रहे थे। उन्होंने खुद को फिट रखना भी छोड़ दिया था।
- सलमान की सलाह: क्रिकेट मैच के बाद एक बातचीत में सलमान ने अपनी कहानी सुनाई कि कैसे उन्होंने अपने बुरे दौर में सनी देओल और संजय दत्त का सहारा लिया था।
- वापसी का मौका: बॉबी ने मजाकिया लेकिन भावनात्मक लहजे में सलमान से कहा, “मामू, तो मुझे अपनी पीठ पर बैठने दो।” इसके कुछ समय बाद सलमान ने उन्हें फोन किया और पूछा, “शर्ट उतारेगा?” और इसी तरह उन्हें ‘रेस 3’ मिली।
सफलता के नए दरवाजे: ‘आश्रम’ से ‘एनिमल’ तक
भले ही ‘रेस 3’ और ‘हाउसफुल 4’ को आलोचकों ने ज्यादा पसंद नहीं किया, लेकिन इन फिल्मों ने बॉबी को युवा पीढ़ी के बीच फिर से पहचान दिलाई।
| माध्यम | भूमिका | प्रभाव | |
|---|---|---|---|
| आश्रम | OTT (वेब सीरीज) | बाबा निराला | उनकी एक्टिंग की गहराई को पहली बार सराहा गया। ‘जपनाम’ का नारा हर तरफ गूंज उठा। |
| एनिमल | सिनेमा (फिल्म) | अबरार हक | फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम महज 10-15 मिनट था, लेकिन उनकी चुप्पी और खूंखार विलेन वाले अंदाज ने पूरी महफिल लूट ली। |
क्यों खास है यह दौर?
- लॉर्ड बॉबी का उदय: ‘एनिमल’ की सफलता ने उन्हें इंटरनेट का नया क्रश और सोशल मीडिया पर ‘लॉर्ड बॉबी’ बना दिया।
- विलेन के रूप में पहचान: बॉबी ने साबित किया कि एक अभिनेता के लिए हीरो होना जरूरी नहीं है; एक दमदार विलेन का किरदार भी उसे सुपरस्टार बना सकता है।
- आने वाले प्रोजेक्ट्स: अब वह साउथ की बड़ी फिल्मों (जैसे ‘कंगुवा’ और ‘डाकू महाराज’) और आर्यन खान की सीरीज ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं।
बॉबी देओल की यह कहानी सिखाती है कि यदि आप खुद पर काम करना न छोड़ें और सही समय का


