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    चुनाव बाद गिरेंगे तेल के दाम, ट्रंप फिर पलटे, रिपब्लिकन पार्टी के लिए बढ़ी चिंता?

    ईरान के साथ जारी युद्ध का असर अब अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था, दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान युद्ध के कारण बढ़ी तेल की कीमतों में गिरावट अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ही देखने को मिल सकती है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं और अमेरिका में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है।

    चुनाव के बाद तेल सस्ता होने का दावा

    ट्रंप ने कहा कि चुनाव के तुरंत बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। उनका दावा है कि ईरान ज्यादा समय तक मौजूदा दबाव का सामना नहीं कर पाएगा और युद्ध भी अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद खत्म हो जाएगा। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को होने हैं।

    ट्रंप ने ईरान पर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने युद्ध खत्म होने की कोई निश्चित तारीख बताने से इनकार किया है। वहीं, रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप के कुछ वरिष्ठ सलाहकारों ने निजी बातचीत में आशंका जताई है कि संघर्ष उनके मौजूदा कार्यकाल के अंत तक भी खिंच सकता है।

    100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल

    मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड बुधवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। यह जुलाई के बाद पहली बार है जब तेल इस स्तर पर पहुंचा है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन बाधित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। इस मार्ग से युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुजरता था।

    अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों में तेजी आई है। नियमित पेट्रोल की औसत कीमत करीब 4.22 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमत करीब 5.94 डॉलर प्रति गैलन बताई गई है। महंगे ईंधन का असर परिवहन, उत्पादन और विमानन क्षेत्र पर भी पड़ रहा है।

    रिपब्लिकन पार्टी के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

    महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें चुनावी साल में रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। महंगे पेट्रोल और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती लागत का सीधा असर मतदाताओं की जेब पर पड़ रहा है। ऐसे में विपक्ष इन मुद्दों को ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों और ईरान युद्ध से जोड़कर चुनावी मुद्दा बना सकता है।

    रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस में फिलहाल बेहद करीबी बहुमत है। ऐसे में अगर महंगाई और युद्ध को लेकर मतदाताओं में नाराजगी बढ़ती है तो नवंबर के चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    ट्रंप ने भले ही चुनाव के बाद तेल कीमतों में बड़ी गिरावट और युद्ध समाप्त होने का दावा किया हो, लेकिन बाजार और अमेरिकी प्रशासन के भीतर मौजूद अनिश्चितता बताती है कि आगे की स्थिति काफी हद तक ईरान युद्ध और होर्मुज में तेल आपूर्ति पर निर्भर करेगी।

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