लोकसभा चुनाव 2029 अभी दूर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर सियासी चर्चाएं अभी से तेज हो गई हैं। एक तरफ बीजेपी में नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे नाम संभावित उत्तराधिकारियों के तौर पर चर्चा में हैं, तो दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर बहस चल रही है। इसी बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) नेता थलपति विजय का नाम भी संभावित राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर उभरने लगा है।
बीजेपी में मोदी के बाद कौन?
2029 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र करीब 78 वर्ष होगी। हालांकि बीजेपी में प्रधानमंत्री पद के लिए 75 वर्ष की कोई औपचारिक सीमा नहीं है, इसलिए सिर्फ उम्र के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह 2029 में चुनावी चेहरा नहीं होंगे। फिर भी राजनीतिक विश्लेषण में यह सवाल उठ रहा है कि अगर बीजेपी नेतृत्व में बदलाव का फैसला करता है तो अगला चेहरा कौन होगा।
इस संभावित दौड़ में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के नाम प्रमुखता से लिए जाते हैं। अमित शाह को बीजेपी के संगठनात्मक और चुनावी रणनीतिकार के तौर पर मजबूत नेता माना जाता है। वहीं योगी आदित्यनाथ की पहचान एक स्पष्ट राजनीतिक छवि वाले नेता के रूप में बनी है। हालांकि पार्टी की ओर से 2029 के प्रधानमंत्री पद के लिए इनमें से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
विपक्ष की तरफ से कांग्रेस नेता राहुल गांधी सबसे प्रमुख संभावित चेहरा हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु के कांग्रेस नेता और मंत्री एस. राजेश कुमार ने तो यहां तक कहा कि अगर गठबंधन राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर समर्थन नहीं देता है तो कांग्रेस के मंत्री सरकार में बने रहने पर पुनर्विचार कर सकते हैं। इससे साफ है कि राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस के भीतर कम से कम एक धड़ा अपना रुख स्पष्ट रखना चाहता है।
थलपति विजय की एंट्री से क्यों बढ़ी हलचल?
यही वह बिंदु है जहां कहानी दिलचस्प हो जाती है। तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से उभरे थलपति विजय को TVK के कुछ नेता प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनके समर्थन में ‘Vijay for PM’ जैसे अभियान और पोस्टर भी सामने आए हैं। इससे कांग्रेस और TVK के बीच भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि विजय ने खुद अब तक प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इसलिए TVK के नेताओं और समर्थकों की मांग को सीधे विजय की आधिकारिक राजनीतिक महत्वाकांक्षा मानना सही नहीं होगा।
सर्वे ने भी बढ़ाई चर्चा
विजय का नाम केवल पार्टी समर्थकों के अभियान तक सीमित नहीं रहा। हालिया एक सर्वे में प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरों में नरेंद्र मोदी के बाद राहुल गांधी और फिर थलपति विजय का नाम सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक विजय को 9 प्रतिशत समर्थन के साथ तीसरा स्थान मिला। उन्होंने इस सर्वे में अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे स्थापित राजनीतिक चेहरों को पीछे छोड़ा।
क्या राहुल बनाम विजय होगी सीधी लड़ाई?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि विजय और राहुल गांधी के बीच अच्छे संबंध हैं और विजय राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन करते हैं। दूसरी ओर TVK के कुछ नेताओं की ओर से विजय को 2029 के लिए आगे बढ़ाने की कोशिशें सामने आई हैं। यानी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
दरअसल 2029 का चुनावी गणित कई राज्यों के गठबंधन, विधानसभा चुनावों के नतीजों और राष्ट्रीय मुद्दों से तय होगा। इसलिए आज की राजनीतिक चर्चाओं को भविष्य का अंतिम समीकरण मानना ठीक नहीं होगा।
निष्कर्ष: 2029 की प्रधानमंत्री पद की रेस अभी खुली हुई है। बीजेपी में मोदी के साथ शाह और योगी जैसे नामों की चर्चा है, कांग्रेस के लिए राहुल गांधी प्रमुख चेहरा हैं और तमिलनाडु से थलपति विजय का उभार विपक्षी गठबंधन के समीकरणों में नया सवाल जोड़ रहा है। आने वाले वर्षों में इन नेताओं की राजनीतिक स्वीकार्यता, गठबंधन क्षमता और चुनावी प्रदर्शन ही तय करेंगे कि 2029 में प्रधानमंत्री पद की असली दौड़ किन चेहरों के बीच होगी।


