पाकिस्तान के आंतरिक हालात और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर वहां की शहबाज शरीफ सरकार के दो सबसे कद्दावर मंत्रियों—रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और गृह मंत्री मोहसिन नकवी—ने अपनी ही व्यवस्था की कमियों और नाकामियों को खुले तौर पर स्वीकार किया है। दोनों नेताओं के बयानों ने न केवल पाकिस्तान के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, बल्कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
भारत से तुलना और आत्ममंथन की सलाह
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बातचीत के दौरान भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए गहरा अफसोस जताया। उन्होंने कहा, “आज हम अपने देश की स्थिति पर नजर डालें। हम और भारत एक ही समय में आजाद हुए थे, लेकिन देखिए कि दोनों देश एक-दूसरे से कितने पीछे या आगे हो गए हैं। भारत कहां पहुंच गया और हम कहां हैं।”
ख्वाजा आसिफ ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने तकनीक, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने पाकिस्तानियों और अपनी सरकार से कहा कि वे अपनी नाकामियों के लिए भारत या किसी अन्य देश को दोष देने के बजाय अपनी सरकार और नीतियों पर सवाल उठाएं। उनका कहना था कि दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय पाकिस्तान को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर देश इस मोड़ पर कैसे पहुंचा।
देश के आंतरिक हालात पर गंभीर चिंता
पाकिस्तान के आंतरिक संकट का जिक्र करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, बलूचिस्तान के हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं, खैबर पख्तूनख्वा के लोग परेशान हैं और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोग अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान वास्तव में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश बचा है।
गृह मंत्री मोहसिन नकवी की चेतावनी
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी देश की राजनीतिक स्थिरता, सेना और सरकार के बीच संतुलन तथा आर्थिक संकट पर खरी-खरी बात कही। नकवी ने स्वीकार किया कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती अशांति के साथ-साथ पूरे देश में महंगाई और बेरोजगारी ने आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठा दिया है।
नकवी ने शहबाज शरीफ सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात इसी तरह बने रहे और सरकार इसी ढर्रे पर काम करती रही, तो मौजूदा सरकार के लिए अपना कार्यकाल पूरा करना भी बेहद मुश्किल हो जाएगा।
राजनीतिक मायनों में हलचल
एक तरफ देश में बलूच विद्रोहियों और अन्य अलगाववादी गुटों का विरोध तेज हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा और गृह मंत्री जैसे अहम पदों पर बैठे नेताओं का यह स्वीकारोक्ति भरा बयान पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव या उठापटक का संकेत माना जा रहा है।


