केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस पार्टी पर कड़ा हमला बोलते हुए उसके रुख को “देश विरोधी फैसला” करार दिया है। गृह मंत्री का यह बयान कांग्रेस कार्य समिति (CWC) द्वारा अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो छंद (stanzas) गाने के 1937 के फैसले पर कायम रहने के निर्णय के बाद आया है।
अमित शाह के बयान के मुख्य बिंदु
- तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति: अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक के लालच और तुष्टिकरण की राजनीति के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का सम्मान नहीं किया और इतिहास में इसे दो टुकड़ों में विभाजित करने का काम किया।
- इतिहास की भूल का जिक्र: गृह मंत्री ने कहा कि देश ने अतीत में ‘वंदे मातरम’ को दो भागों में बांटे जाने की गलती की कीमत चुकाई है। अब देश को इस ऐतिहासिक भूल को सुधारकर पूरे राष्ट्रगीत का सम्मान करना चाहिए।
- स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान: उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाते हुए लाखों देशभक्तों ने फांसी के फंदे को चूमा, लाठियां और गोलियां खाईं। इसे अधूरा छोड़ना या इसके पूरे गायन से असहज होना देश के स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है।
विवाद का क्या है कारण?
- स्वतंत्रता दिवस का घटनाक्रम: 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ था। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत का पूरा गायन रोकने का प्रयास किया।
- CWC की बैठक में 1937 का प्रस्ताव दोहराया: इस विवाद के बीच कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने बैठक कर स्पष्ट किया कि पार्टी 28 अक्टूबर 1937 के अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव पर ही कायम रहेगी। इस प्रस्ताव के तहत कांग्रेस के आधिकारिक सम्मेलनों में वंदे मातरम के पहले दो छंद ही गाए जाते हैं।
- कांग्रेस का पक्ष: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सहमति से यह निर्णय लिया गया था। पार्टी ने कहा कि 15 अगस्त के कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत गाया गया था और सोनिया गांधी केवल लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने की बात कह रही थीं।
केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत के संबंध में जारी नई एडवाइजरी और संसद में पारित नियमों के बाद ‘वंदे मातरम’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।


