पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब एक नए और भयावह मोड़ पर पहुंच गया है। 2 अप्रैल 2026 को अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान के पास स्थित देश के सबसे ऊंचे और महत्वपूर्ण B1 ब्रिज (B1 Bridge) पर भारी बमबारी की। इस हमले ने न केवल ईरान के बुनियादी ढांचे को हिला कर रख दिया है, बल्कि मानवीय त्रासदी को भी गहरा दिया है।
हमले का विवरण और हताहतों की संख्या
ईरान के अलबोर्ज प्रांत के अधिकारियों और सरकारी मीडिया (Press TV) के अनुसार, इस हमले में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 95 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चश्मदीदों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पुल पर दो बार हमला किया गया। पहला हमला होते ही जब राहत और बचाव टीमें घायलों की मदद के लिए पहुंचीं, तभी दूसरा हमला किया गया, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ गई।
- शिकार कौन बना: मरने वालों में स्थानीय ग्रामीण, यात्री और ‘नेचर डे’ (Nature Day) मनाने आए परिवार शामिल थे।
क्यों बनाया गया इस पुल को निशाना?
1,050 मीटर लंबा और 136 मीटर ऊंचा यह पुल ईरान की इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना माना जाता था। इसे निशाना बनाने के पीछे कई सामरिक और मनोवैज्ञानिक कारण बताए जा रहे हैं:
- रणनीतिक संपर्क तोड़ना: यह पुल तेहरान को उत्तर-पश्चिमी प्रांतों से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग था। इसे नष्ट करके ईरान की रसद (Logistics) और सैन्य आवाजाही को बाधित करने की कोशिश की गई है।
- आर्थिक चोट: यह हमला ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाने की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत स्टील प्लांट और ऊर्जा केंद्रों को भी ध्वस्त किया जा रहा है।
- मनोवैज्ञानिक दबाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया और चेतावनी दी कि “ईरान का सबसे बड़ा पुल गिर चुका है, अब समझौते का समय है, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान ने इसे “नागरिक बुनियादी ढांचे पर अवैध आक्रमण” बताया है और कसम खाई है कि इसका “करारा जवाब” दिया जाएगा। ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि जब तक दुश्मन आत्मसमर्पण नहीं करता, यह संघर्ष जारी रहेगा।
वर्तमान स्थिति
अलबोर्ज प्रांत के कराज शहर में स्थित इस पुल का मध्य हिस्सा पूरी तरह से ढह चुका है। हमले के बाद कई इलाकों में बिजली गुल हो गई है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते हमले इस युद्ध को और भी विनाशकारी बना सकते हैं।


