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देश संविधान से नहीं, उद्योगपतियों की मर्जी से चल रहा, राहुल ने पतंजलि का भी लिया नाम

असम में आयोजित एक विशाल जनसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने संविधान की रक्षा के बहाने देश के बड़े औद्योगिक घरानों और निजी संस्थानों को घेरे में लिया।

संविधान और ‘दो-तीन उद्योगपतियों’ का शासन

राहुल गांधी ने एक बार फिर अपना पुराना नैरेटिव दोहराते हुए कहा कि आज देश संविधान से नहीं, बल्कि दो-तीन बड़े उद्योगपतियों की मर्जी से चल रहा है।

  • अदाणी और पतंजलि का जिक्र: राहुल ने सीधे तौर पर अदाणी (Adani) और पतंजलि (Patanjali) का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश के संसाधन और जनता का पैसा इन संस्थाओं की जेब में डाल रही है।
  • संविधान पर खतरा: उन्होंने दावा किया कि बीजेपी और आरएसएस मिलकर संविधान को खत्म करना चाहते हैं ताकि गरीबों, पिछड़ों और दलितों के अधिकार छीनकर ‘मित्रों’ को दिए जा सकें।

असम की स्थानीय पहचान और CAA

असम के संदर्भ में राहुल गांधी ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ा:

  • असमिया अस्मिता: उन्होंने कहा कि बीजेपी असम की संस्कृति और भाषा पर आक्रमण कर रही है। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस सत्ता में आने पर असम की विशिष्ट पहचान को सुरक्षित रखेगी।
  • CAA पर कड़ा रुख: राहुल ने दोहराया कि वह किसी भी कीमत पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू नहीं होने देंगे, क्योंकि यह असम के सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ है।

बेरोजगारी और महंगाई पर घेरा

  • युवाओं का मुद्दा: रैली में राहुल ने असम के युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और कहा कि पतंजलि जैसी संस्थाओं को जमीनें तो दी जा रही हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रही हैं।
  • न्याय योजना का वादा: उन्होंने कांग्रेस की ‘न्याय’ (NYAY) जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य सीधे जनता के बैंक खातों में पैसा पहुँचाना है, न कि केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाना।

राजनीतिक विश्लेषण

2026 के विधानसभा चुनावों से पहले असम में राहुल गांधी की यह रैली कांग्रेस के चुनावी शंखनाद के रूप में देखी जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अदाणी-पतंजलि’ और ‘संविधान’ के मुद्दे को असम के स्थानीय हितों के साथ जोड़कर राहुल गांधी एक बड़ा दांव चल रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान अपने गले में ‘गमोसा’ पहन रखा था और उस पर ‘No CAA’ के प्रतीक के जरिए सरकार को कड़ा संदेश दिया।

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