बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा किए गए हालिया भीषण हमलों ने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने अब इन हमलों के पीछे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का हाथ होने का दावा किया है, जिसे उन्होंने ‘ग्वादर कनेक्शन’ से जोड़ा है। साथ ही, भारत पर भी पुराने इल्जाम दोहराए गए हैं।
भीषण हमलों का दौर
बीते एक हफ्ते में बलूचिस्तान के 12 से अधिक शहरों में बीएलए ने योजनाबद्ध तरीके से पाकिस्तानी सेना और सरकारी दफ्तरों पर हमले किए हैं। पाकिस्तानी एक्सपर्ट अली मुस्तफा का तर्क है कि इन हमलों की जटिलता और उपयोग किए गए आधुनिक हथियार बताते हैं कि इन्हें किसी बड़ी विदेशी शक्ति का समर्थन प्राप्त है।
ग्वादर कनेक्शन और UAE का आर्थिक हित
पाकिस्तानी विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई का बलूचिस्तान को अस्थिर करने में गहरा आर्थिक हित छिपा है:
- बंदरगाहों की प्रतिस्पर्धा: यूएई के जेबेल अली (दुबई) पोर्ट का अरब सागर में दबदबा है। पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट (चीन की मदद से विकसित) इस दबदबे के लिए सीधा खतरा है।
- अस्थिरता में लाभ: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्वादर अस्थिर रहता है और वहां चीनी इंजीनियरों पर हमले होते हैं, तो समुद्री व्यापार का केंद्र दुबई ही बना रहेगा। यूएई चाहता है कि दुनिया ग्वादर से दूर रहे ताकि उसका कार्गो बिजनेस प्रभावित न हो।
- राजनीतिक तनाव: सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी और यूएई-सऊदी के बीच के तनाव ने भी रिश्तों में खटास पैदा की है।
भारत और दुबई का ‘रास्ता’
पाकिस्तान हमेशा से बलूचिस्तान में भारत के दखल का आरोप लगाता रहा है। अली मुस्तफा ने इस बार नया पहलू जोड़ा है:
- उनका दावा है कि भारत के लिए अफगानिस्तान या ईरान के रास्ते मदद भेजना अब मुश्किल है।
- ऐसे में यूएई में भारत के मजबूत प्रभाव को देखते हुए, वे शक जता रहे हैं कि दुबई एक ‘ट्रांजिट’ या ‘रूट’ हो सकता है जिसके जरिए बीएलए को समर्थन मिल रहा है।
- वरिष्ठ पत्रकार अबसार आलम ने भी आरोप लगाया कि टीटीपी और बीएलए के लड़ाकों को यूएई में शरण और वित्तीय मदद मिल रही है।
- पाकिस्तान के इन आरोपों के पीछे उनकी अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलता को छिपाने की कोशिश भी देखी जा रही है। जहां एक ओर वे भारत को घेरने की कोशिश करते हैं, वहीं अब अपने ‘ब्रदरली कंट्री’ यूएई पर भी शक की सुई घुमा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की बदलती विदेश नीति और क्षेत्रीय असुरक्षा का प्रतीक है।


