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    ट्रंप ने टाला ईरान पर हमला, खाड़ी देशों का दिया हवाला, कहा- समझौता करो वरना होगा विनाश

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य हमले को आखिरी समय पर टालने का बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने यह कदम खाड़ी क्षेत्र के मित्र देशों (जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर) की विशेष अपील और मध्यस्थता के प्रयासों के बाद उठाया है। हालांकि, इस बड़ी राहत के साथ ही ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में अंतिम चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने दो टूक कहा है कि या तो ईरान तुरंत मेज पर आए और नया परमाणु समझौता करे, वरना वह अगले किसी भी बड़े सैन्य हमले के लिए पूरी तरह तैयार रहे।


    खाड़ी देशों की मध्यस्थता और ट्रंप का रुख

    पश्चिम एशिया में पिछले 52 दिनों से जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ईरान पर हमले की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और हमारी सेना बस आदेश का इंतजार कर रही थी। लेकिन सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे हमारे खाड़ी सहयोगियों ने हमसे संपर्क किया। उन्होंने चिंता जताई कि इस सीधे हमले से पूरे क्षेत्र में तेल की आपूर्ति ठप हो जाएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है। उनके आग्रह और शांति को एक आखिरी मौका देने के लिए मैंने अपने कदम पीछे खींचे हैं।”


    ट्रंप की ईरान को अंतिम चेतावनी: ‘समझौता करो या भुगतो’

    हमला टालने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति के तेवर बेहद आक्रामक बने हुए हैं। उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा है कि यह रियायत बेहद सीमित समय के लिए है।

    • नया समझौता ही एकमात्र रास्ता: ट्रंप प्रशासन की मांग है कि ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को तुरंत पूरी तरह बंद करना होगा, अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगानी होगी और क्षेत्र में सक्रिय अपने प्रॉक्सी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूथी) को वित्तीय मदद देना बंद करना होगा।
    • तबाही के लिए तैयार रहने की धमकी: ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने आने वाले कुछ दिनों के भीतर बातचीत शुरू नहीं की, तो अमेरिका उस पर अब तक का सबसे भीषण सैन्य हमला करेगा, जिसके परिणाम भुगतने के लिए तेहरान खुद जिम्मेदार होगा।

    वैश्विक बाजार और भारत पर असर

    ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक बाजारों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। इस खबर के आते ही कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में चल रही रिकॉर्ड तेजी पर मामूली ब्रेक लगा है। भारत जैसे देशों के लिए यह खबर रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सीधे तौर पर समुद्री सुरक्षा और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब पूरा दारोमदार इस बात पर है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने झुकता है या टकराव का रास्ता चुनता है।

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