संसद के मानसून सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को लोकसभा के पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा सदन में पेश किए गए निलंबन प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
सदन की अध्यक्षता कर रहे पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेनेटी ने कहा कि टीएमसी सांसद का आचरण और उनकी टिप्पणियां “सदन की गरिमा के खिलाफ” थीं।
TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर क्या हैं आरोप?
कल्याण बनर्जी के खिलाफ निलंबन की यह कार्रवाई मुख्य रूप से लोकसभा कक्ष के अंदर महिला सांसदों के प्रति अभद्र और असंसदीय भाषा के इस्तेमाल के आरोप में की गई है।
1. महिला सांसदों के साथ बहस और अभद्र भाषा का प्रयोग:
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान कल्याण बनर्जी की अपने ही पूर्व सहयोगियों और नेशनल सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की महिला सांसदों के साथ तीखी नोकझोंक हुई। आरोप है कि उन्होंने महिला सांसदों के खिलाफ अलोकतांत्रिक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया।
2. महिला सांसदों द्वारा स्पीकर से शिकायत:
घटना के बाद NCPI की महिला सांसद मितली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कक्ष में मुलाकात की। उन्होंने सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
क्या है पूरा मामला और राजनीतिक पृष्ठभूमि?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद टीएमसी के करीब 20 पूर्व सांसद पार्टी से अलग होकर NCPI में शामिल हो गए थे और वे लोकसभा में अलग बैठते हैं।
सदन में इसी गुट के सांसदों और कल्याण बनर्जी के बीच बहस शुरू हुई। बहस के दौरान जब कल्याण बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए टिप्पणी की, तो विवाद काफी बढ़ गया।
संसदीय पीठ का बयान: “एक महिला सदस्य के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द और आचरण किसी भी सांसद को शोभा नहीं देते। इस तरह का व्यवहार सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।”
आगे की स्थिति
निलंबन प्रस्ताव पारित होने के बाद पीठ ने कल्याण बनर्जी को तुरंत सदन और संसद परिसर से बाहर जाने का निर्देश दिया। दूसरी ओर, विपक्ष नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन कर रहा है। कल्याण बनर्जी 13 अगस्त तक चलने वाले इस पूरे मानसून सत्र की बाकी बची अवधि के दौरान सदन की बैठकों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।


