अयोध्या के भव्य राम मंदिर में वीआईपी पास (VIP Passes) और विशेष पूजा के लिए मिलने वाले चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन और धोखाधड़ी के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन (Faizabad Bar Association) ने इस महाघोटाले के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी तुरंत अयोध्या नहीं छोड़ते हैं, तो वे एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
वकीलों का अल्टीमेटम: ‘चंपत राय और उनके साथी अयोध्या छोड़ें’
फैजाबाद बार एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन पर तीखे सवाल उठाए गए। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:
- आस्था के साथ खिलवाड़: देश-विदेश के करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित किया था। ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के संरक्षण के बिना इतना बड़ा गबन होना असंभव है।
- अयोध्या छोड़ने की मांग: वकीलों ने साफ शब्दों में कहा कि चंपत राय और उनके दागी सहयोगियों को तत्काल अपने पदों से इस्तीफा देकर अयोध्या की पवित्र भूमि को छोड़ देना चाहिए।
- आंदोलन की चेतावनी: बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और मुख्य साजिशकर्ताओं को नहीं हटाया गया, तो अयोध्या और फैजाबाद के वकील सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे।
वकीलों का बड़ा फैसला: ‘कोई नहीं लड़ेगा आरोपियों का केस’
इस मामले की संवेदनशीलता और जनभावनाओं को देखते हुए फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है:
- वकालत का बहिष्कार: बार एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्य वकीलों को निर्देश जारी किया है कि इस महाघोटाले में शामिल किसी भी आरोपी की तरफ से कोई भी अधिवक्ता पैरवी या वकालत नहीं करेगा।
- दोषियों को सजा की मांग: वकीलों का कहना है कि यह देश की आस्था पर चोट है, इसलिए किसी भी आरोपी को कानूनी मदद नहीं मिलनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में अयोध्या पुलिस ने राम मंदिर में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से वीआईपी दर्शन और विशेष पूजा के नाम पर आने वाले चढ़ावे में बड़े पैमाने पर हेरफेर का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया कि ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी ठगों के साथ मिलकर फर्जी रसीदें और पास जारी किए और चढ़ावे की एक बड़ी राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा कराने के बजाय आपस में बांट ली। इस खुलासे के बाद से ही विपक्षी दल और स्थानीय संगठन ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।


