जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि प्रशांत महासागर में एक अभूतपूर्व और अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो (Super El Niño) आकार ले रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग और इस अल नीनो का संयुक्त प्रभाव साल 2027 को मानव इतिहास का सबसे गर्म साल बना सकता है। ब्रिटेन के मौसम विज्ञान विभाग (Met Office) के प्रोफेसर एडम स्काइफ के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल नीनो का इतना तीव्र संकेत आधुनिक क्लाइमेट रिकॉर्ड्स (100 से अधिक वर्षों) में कभी नहीं देखा गया।
- प्रशांत महासागर के सतह का तापमान सामान्य से 3°C से अधिक ऊपर जाने का अनुमान है, जबकि सामान्य मजबूत अल नीनो में यह बढ़ोतरी 1 से 2°C ही होती है। प्रशांत महासागर में लगभग 100 मीटर की गहराई पर पानी का तापमान सामान्य से करीब 8°C अधिक दर्ज किया गया है, जो आने वाले महीनों में इसे और भीषण बनाएगा।
2027 क्यों बनेगा सबसे गर्म साल?
अल नीनो के दौरान महासागर से भारी मात्रा में गर्मी वायुमंडल में छोड़ दी जाती है। इस गर्मी का चरम प्रभाव आमतौर पर अल नीनो के चरम पर पहुंचने के अगले साल देखने को मिलता है। इसी कारण वैज्ञानिक निक डनस्टोन ने अनुमान जताया है कि 2027 में वैश्विक तापमान 2024 के सर्वकालिक रिकॉर्ड को आसानी से तोड़ देगा।
भारत और वैश्विक मौसम पर प्रभाव:
अल नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रभावित हो रहा है, जिससे कई हिस्सों में औसत से कम बारिश और सूखे के हालात बन सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भीषण सूखा व जंगलों में आग लग सकती है। वहीं, पेरू और अमेरिका के दक्षिणी इलाकों में भीषण बाढ़ का खतरा बढ़ेगा।
1. मानसून पर असर (कम बारिश और सूखा)
- मानसून की सुस्ती: अल नीनो के कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने और लंबे समय तक सूखा (Dry Spells) रहने की आशंका है।
- असमान वर्षा वितरण: विशेष रूप से मध्य, उत्तर-पश्चिम और तटीय भारत के कुछ इलाकों में मानसून की बारिश में भारी गिरावट देखी जा सकती है।
2. रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी (Heatwaves)
- वसंत और गर्मी के मौसम में प्रचंड तपन: अल नीनो के कारण भारत में साल के शुरुआती महीनों (मार्च से जून) में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहेगा।
- लू के थपेड़े: देश के कई राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि) में रिकॉर्ड-तोड़ भीषण लू (Heatwave) चलने की संभावना जताई जा रही है।
3. कृषि और फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव
- खरीफ और रबी फसलों को नुकसान: बारिश कम होने या समय पर न होने से धान, सोयाबीन, मक्का और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई और पैदावार प्रभावित होगी। वहीं, अत्यधिक गर्मी के चलते रबी (जैसे गेहूं और सरसों) की फसल पर भी असर पड़ेगा।
- सिंचाई और जलस्तर पर दबाव: जलाशयों, नदियों और भूजल का स्तर घटने से सिंचाई की लागत बढ़ेगी और बारिश पर निर्भर खेती (Rain-fed Agriculture) को बड़ा झटका लग सकता है।
4. खाद्य महंगाई और आर्थिक चुनौतियाँ
- खाद्य वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी: फसलों के कम उत्पादन से अनाज, सब्जियों, दालों और तिलहन की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर: भारत में लगभग आधी से अधिक कृषि वर्षा पर निर्भर है; ऐसे में कृषि उत्पादन घटने से ग्रामीण आय और मांग कमजोर हो सकती है।
5. बिजली संकट और जल संकट
- प्रचंड गर्मी के कारण एसी, कूलर और पंखों के अत्यधिक इस्तेमाल से बिजली की मांग चरम (Peak Demand) पर पहुंच जाएगी।
- कम बारिश और जलस्रोतों के सूखने के कारण देश के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में पेयजल (Drinking Water) का संकट भी गहरा सकता है।
राहत का विकल्प (Indian Ocean Dipole): हालांकि, मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यदि हिंद महासागर में ‘पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल’ (Positive IOD) विकसित होता है, तो यह अल नीनो के नकारात्मक असर को कुछ हद तक बेअसर (Offset) करके भारत में मानसून सुधारने में मदद कर सकता है।


