भारतीय पुरुष हॉकी टीम का एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में सफर निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए अहम मुकाबले में भारत को अर्जेंटीना के खिलाफ बड़ी जीत की जरूरत थी, लेकिन हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली टीम 3-5 से हार गई। इस हार के साथ भारत का विश्व कप से बाहर होना तय हो गया और 1975 के बाद पहली बार विश्व खिताब जीतने का इंतजार 51 साल से आगे बढ़ गया।
मुकाबले में अर्जेंटीना ने शुरुआत से ही भारतीय टीम पर दबाव बनाया। दक्षिण अमेरिकी टीम ने शुरुआती मिनटों में तेजी से गोल कर बढ़त बनाई, जिससे भारत को शुरुआत में ही मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। भारत ने सुखजीत सिंह के गोल से वापसी की उम्मीद जगाई, लेकिन अर्जेंटीना ने अपने आक्रमण को लगातार मजबूत बनाए रखा। दूसरे हाफ में भी भारतीय रक्षा पंक्ति की कमजोरियां सामने आईं और विरोधी टीम ने बढ़त को और बड़ा कर दिया।
भारतीय टीम ने अंतिम चरण में संघर्ष जरूर किया और गोल करके वापसी की कोशिश की, लेकिन तब तक मुकाबला काफी हद तक हाथ से निकल चुका था। 53वें मिनट में अर्जेंटीना के लुकास टोस्कानी के गोल ने भारत की मुश्किलें और बढ़ा दीं। टीम को सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए केवल जीत ही नहीं, बल्कि गोल अंतर के लिहाज से भी बेहतर प्रदर्शन की जरूरत थी। इसके बजाय भारत को हार का सामना करना पड़ा।
शुरुआती गलतियां पड़ीं भारी
भारत के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने हार के बाद टीम की धीमी शुरुआत और दबाव वाले मुकाबले में गलतियों को अहम कारण माना। भारतीय टीम ने कुछ अच्छे मौके बनाए और पेनल्टी कॉर्नर के जरिए भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन रक्षात्मक चूक महंगी साबित हुई। सुखजीत सिंह ने भी शुरुआती गोल गंवाने और डिफेंस में हुई गलतियों को टीम के लिए बड़ा झटका माना।
इस हार ने एक बार फिर भारतीय हॉकी के विश्व कप रिकॉर्ड पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत ने आखिरी बार 1975 में मलेशिया में विश्व कप का खिताब जीता था। उसके बाद कई बार टीम ने उम्मीदें जगाईं, लेकिन विश्व चैंपियन बनने का सपना अधूरा ही रहा। इस बार भी ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय प्रशंसकों को बड़ी उम्मीद थी, मगर टीम अंतिम चार की दौड़ तक नहीं पहुंच सकी।
हार के बाद पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भी भारतीय हॉकी व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। पुरुष और महिला, दोनों टीमों के सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाने के बाद प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर नई बहस शुरू हो गई है।


