पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। लेबनान पर इजरायल के हालिया भीषण हमलों से भड़के ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग, होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) को एक बार फिर पूरी तरह बंद करने का एलान कर दिया है। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का संकट मंडरा रहा है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद अप्रत्याशित और बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर ‘शुल्क’ (Toll) लगाना शुरू कर देगा।
इजरायली हमलों से नाराज ईरान का बड़ा कदम
ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने घोषणा की है कि लेबनान में इजरायल द्वारा की जा रही लगातार बमबारी और संप्रभुता के उल्लंघन के विरोध में वे होर्मुज जलसंधि से किसी भी वाणिज्यिक जहाज को गुजरने नहीं देंगे।
“अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इजरायल की आक्रामकता को रोकने में नाकाम रहा है। ऐसे में ईरान अपने सहयोगियों की रक्षा और पश्चिम एशिया में अमेरिकी-इजरायली एकाधिकार को चुनौती देने के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद कर रहा है।” — ईरानी सैन्य प्रवक्ता
होर्मुज जलसंधि बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। भारत समेत कई एशियाई देशों के ऊर्जा सुरक्षा समीकरण इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की ‘टोल टैक्स’ की धमकी
ईरान के इस कदम के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने सोशल मीडिया और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए दुनिया को चौंकाते हुए कहा कि अगर ईरान ने 60 दिनों के भीतर अमेरिकी शर्तों पर अंतिम समझौता नहीं किया, तो अमेरिका होर्मुज जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोहरे घटनाक्रमों से आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती वाली है:
- ऊर्जा संकट: भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जो इसी मार्ग से आता है। जलसंधि बंद होने से सप्लाई चेन टूट जाएगी।
- सुरक्षा और लागत: यदि अमेरिका वहां टोल वसूलना शुरू करता है, तो शिपिंग और बीमा की लागत काफी बढ़ जाएगी, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक ताकतें इस संकट को टालने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रही हैं, लेकिन दोनों पक्षों के अड़ियल रुख को देखते हुए तनाव कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।


