नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को रद्द करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
- अनुच्छेद 142 का प्रयोग और FIR रद्द: केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए देशभर में दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि छात्रों का करियर और उनका भविष्य सुरक्षित रखना प्राथमिकता है।
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा: नीट विवाद, परीक्षा रद्द होने के मानसिक तनाव और उसके बाद हुए घटनाक्रम में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों तथा पुलिस कार्रवाई में घायल हुए युवाओं को उचित मुआवजा देने के लिए कोर्ट और सरकार के बीच सहमति बनी है।
- 2873 लोगों पर नई जांच क्यों? दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष याचिका दाखिल कर 13 पुरानी एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन साथ ही 20 जुलाई को संसद मार्ग पर हुए उग्र प्रदर्शन और हिंसा का हवाला दिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा, तोड़फोड़ और उपद्रव फैलाने वाले 2,873 उपद्रवियों/असामाजिक तत्वों को चिह्नित किया गया है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि निर्दोष और सामान्य प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत दी जाए, जबकि हिंसा में शामिल रहे 2,873 विशिष्ट लोगों की भूमिका की जांच के लिए कानून के तहत नई और निष्पक्ष कार्रवाई करने की अनुमति होगी।
पृष्ठभूमि और घटनाक्रम:
- आंदोलन की शुरुआत: नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ था।
- 20 जुलाई की हिंसा: जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया था।
- समझौता और मांगें: तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सरकार द्वारा मांगों पर विचार करने के आश्वासन के बाद 25 जुलाई को आंदोलन स्थगित किया गया था।
सरकार द्वारा एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने और सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद छात्र संगठनों ने अपने आगामी 5 सितंबर के विरोध मार्च को वापस लेने का संकेत दिया है।


