राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ पर एक बार फिर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज और बीजेपी विधायक ने सोनिया गांधी के बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है: उन्होंने सोनिया गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। बंकिम चंद्र के वंशज ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र था। इसे लेकर की गई टिप्पणी देश के लाखों शहीदों के बलिदान और राष्ट्रीय स्वाभिमान का सीधा अपमान है।
बीजेपी का कांग्रेस पर करारा हमला
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व—सोनिया गांधी व राहुल गांधी—पर तीखा हमला बोला है। प्रदीप भंडारी ने सवाल उठाया कि जब देश में कहीं ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगते हैं, तब कांग्रेस नेतृत्व चुप्पी साध लेता है, लेकिन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का नाम आते ही कांग्रेस में इतनी बेचैनी क्यों बढ़ जाती है? बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से राष्ट्रीय प्रतीकों का अनादर करने और वोट बैंक तथा तुष्टिकरण की राजनीति करने की दोषी रही है।
विवाद का मुख्य कारण
15 अगस्त को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर उन्होंने सोनिया गांधी से देशवासियों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। चटर्जी ने लिखा कि जब देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा था, उस समय एआईसीसी मुख्यालय में घटित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण थी, बल्कि ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराने जैसी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गा रहे थे, तब सोनिया गांधी की स्पष्ट बेचैनी, नाराजगी और इसे रोकने की बार-बार की कोशिशों ने उन्हें और देशवासियों को बेहद दुखी किया। उन्होंने श्री अरविंदो के विचारों का हवाला देते हुए लिखा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति का मूल मंत्र था। आजाद भारत की धरती पर इस मंत्र को पूरा गाने में अनिच्छा दिखाना खुदीराम बोस जैसे लाखों क्रांतिकारियों और शहीदों के बलिदान का अनादर है।
- 1937 के समझौते का जिक्र: पत्र में 1937 के कांग्रेस अधिवेशन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि तब मोहम्मद अली जिन्ना के विरोध के आगे झुकते हुए गीत को छोटा किया गया था, और 15 अगस्त को भी उसी पुरानी नीति की झलक देखने को मिली।
‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक संदर्भ
1870 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित और उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल ‘वंदे मातरम्’ ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्तों के भीतर ऊर्जा का संचार किया था। 1950 में संविधान सभा ने इसके शुरुआती पदों को भारत का राष्ट्रीय गीत (National Song) स्वीकार किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल और स्वतंत्रता दिवस के आसपास इस तरह के बयानबाजी से यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
कांग्रेस की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि वीडियो को भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा है और सोनिया गांधी केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने या बैठने को लेकर बात कर रही थीं, न कि राष्ट्रगीत को रोकने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि, बीजेपी नेताओं और सुमित्रो चटर्जी ने इसे ‘राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर’ बताते हुए कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।


