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    पश्चिम एशिया में तबाही: अमेरिकी हवाई हमलों में 30 से अधिक की मौत, भड़का ईरान

    पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध अब तक के सबसे भयानक दौर में पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के तटीय इलाकों और सैन्य ठिकानों पर की गई भीषण बमबारी में 30 से अधिक आम नागरिकों और सैनिकों की मौत हो गई है। इस भीषण हमले के बाद ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी (Fatemeh Mohajerani) ने मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि दक्षिणी ईरान इस समय सबसे भीषण हमलों का सामना कर रहा है।

    ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस हालिया हवाई हमले में 260 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं ईरान के बुशहर (Bushehr) शहर समेत कई प्रमुख द्वीप और बंदरगाह धमाकों से दहल उठे हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में आमने-सामने की जंग

    अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान की हमलावर क्षमता को नष्ट करने के लिए यह पांचवें दौर की सख्त कार्रवाई की है।

    • ईरान का पलटवार: अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रातभर में दर्जनों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
    • अमेरिकी बेस पर हमला: IRGC ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet HQ) के मुख्यालय, कुवैत और जॉर्डन के अमेरिकी हवाई ठिकानों पर भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। हालांकि, जॉर्डन की सेना का कहना है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली तीन ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया है।

    शांति समझौता (MoU) पूरी तरह ध्वस्त

    इस ताजा खूनखराबे के बाद दोनों देशों के बीच जून 2026 में हुआ अंतरिम शांति समझौता (MoU) अब पूरी तरह से खत्म माना जा रहा है। ईरान के उप-विदेश मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने के बाद अब तेहरान किसी भी समझौते का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।

    दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी जिद दोहराते हुए कहा है कि ईरान पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वे पूरी तरह से बातचीत की मेज पर नहीं आ जाते। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे, तो अगले चरण में उसके बिजली घर (Power Plants) और बड़े पुल उनके निशाने पर होंगे।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर

    क्षेत्रसंभावित प्रभाव
    क्रूड ऑयल (कच्चा तेल)होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल पार जा सकती हैं।
    भारतीय नौवहन (Shipping)खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज में भारत के 9 व्यापारिक जहाज और लगभग 198 नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट है।
    महंगाई दरयुद्ध के चलते भारत में थोक महंगाई (WPI) जून में बढ़कर 9.87% और खुदरा महंगाई 4.38% के 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है।

    ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने दोटूक लहजे में कहा है कि अमेरिका की धमकियों के आगे होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा, बल्कि यह सिर्फ ‘ईरानी व्यवस्था और शर्तों’ के तहत ही संचालित होगा। इस जिद और टकराव ने पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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