भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने इतिहास रच दिया है। टोक्यो में खेले गए बीडब्ल्यूएफ (BWF) जापान ओपन सुपर-750 टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में सिंधु ने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रही जापान की विश्व नंबर-तीन अकाने यामागुची को सीधे गेमों में हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इसके साथ ही वह जापान ओपन का खिताब जीतने वाली इतिहास की पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
रोमांचक फाइनल में यामागुची को दी मात
टोक्यो के कोर्ट पर करीब 50 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में पीवी सिंधू ने शुरुआत से ही जबरदस्त आक्रामकता दिखाई। उन्होंने मेजबान खिलाड़ी अकाने यामागुची को सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से शिकस्त दी।
- पहला गेम: शुरुआती गेम बेहद संघर्षपूर्ण रहा। दोनों खिलाड़ी एक-एक अंक के लिए जूझती दिखीं और एक समय स्कोर 17-17 की बराबरी पर था। इसके बाद सिंधू ने अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए लगातार चार अंक बटोरे और पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया।
- दूसरा गेम: दूसरे गेम में सिंधू ने यामागुची को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शुरुआत से ही 8-3 और फिर 14-7 की मजबूत बढ़त बना ली। यामागुची ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन सिंधू के सटीक स्मैश और बेहतरीन नेट प्ले के सामने उनकी एक न चली। सिंधू ने दूसरा गेम भी 21-17 से जीतकर खिताबी जीत दर्ज की।
सात साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म
सिंधू के करियर के लिए यह जीत एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाली है। उन्होंने करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद सुपर-750 या उससे बड़े स्तर का कोई मेजर बीडब्ल्यूएफ खिताब जीता है।
इससे पहले सिंधू ने साल 2019 में विश्व चैंपियनशिप (World Championship) में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वहीं, दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल का खिताब जीतने के बाद यह उनका पहला बीडब्ल्यूएफ टूर खिताब भी है।
पूरे टूर्नामेंट में दिखा ‘पुरानी सिंधू’ का जलवा
इस पूरे टूर्नामेंट में पीवी सिंधू अपनी पुरानी और घातक लय में नजर आईं। उन्होंने पहले दौर में मलेशिया की वोंग लिंग चिंग को आसानी से हराया, जिसके बाद प्री-क्वार्टर फाइनल में विश्व नंबर-पांच हान युइ को मात देकर अपना दबदबा साबित किया। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में उन्हें नोजोमी ओकुहारा के चोटिल होने के कारण वॉकओवर मिला, लेकिन सेमीफाइनल में उन्होंने चीन की मजबूत खिलाड़ी चेन युफेई को शिकस्त देकर फाइनल का टिकट कटाया था।
इस ऐतिहासिक खिताबी जीत के बाद पीवी सिंधू ने न सिर्फ अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया है, बल्कि आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय बैडमिंटन फैंस की उम्मीदों को भी एक नई उड़ान दे दी है।


