साल 2022 की हिट फिल्म ‘वध’ के बाद, निर्देशक जसपाल सिंह संधू एक बार फिर ‘वध 2’ के साथ दर्शकों के बीच लौटे हैं। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की जोड़ी ने इस बार भी अपनी अदाकारी से फिल्म में जान फूंक दी है। यह फिल्म न केवल एक सस्पेंस थ्रिलर है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और न्याय की जटिल परतों को भी बखूबी उजागर करती है।
कहानी और अभिनय का जादू
फिल्म की शुरुआत वहीं से होती है जहां पहला भाग खत्म हुआ था—शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) और मंजू (नीना गुप्ता) के उस कृत्य से, जिसे उन्होंने ‘वध’ करार दिया था। इस बार कहानी का दायरा बड़ा है। पुलिस और कानून के शिकंजे के बीच एक बुजुर्ग दंपत्ति की मानसिक जद्दोजहद को दिखाया गया है।
- संजय मिश्रा: उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि बिना शोर मचाए भी अभिनय से धमाका किया जा सकता है। उनके चेहरे की मासूमियत और आंखों में छिपा अपराधबोध दर्शकों को फिल्म से अंत तक बांधे रखता है।
- नीना गुप्ता: मंजू के किरदार में उन्होंने एक डरपोक लेकिन अपने पति के साथ चट्टान की तरह खड़ी पत्नी की भूमिका को जीवंत किया है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक जसपाल सिंह संधू ने फिल्म की रफ्तार को थ्रिलर के अनुरूप धीमा लेकिन प्रभावशाली रखा है। फिल्म का असली हीरो इसका क्लाइमैक्स है। जब दर्शकों को लगता है कि उन्हें कहानी समझ आ गई है, निर्देशक वहां से पासा पलट देते हैं। योगिता बिहानी ने पुलिस अफसर के किरदार में पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक परिपक्वता दिखाई है।
कमजोर कड़ी और मजबूत पक्ष
- मजबूत पक्ष: फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत कसा हुआ है। बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को गहरा करने में मदद करता है।
- कमजोर पक्ष: फिल्म का मध्य भाग (Intermission के बाद) थोड़ा खिंचा हुआ महसूस होता है, जहां कुछ दृश्य दोहराव वाले लगते हैं।
- ‘वध 2’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सवाल है कि क्या कानून से ऊपर उठकर किया गया न्याय सही है? अगर आप संजीदा अभिनय और दिमाग घुमा देने वाले क्लाइमैक्स के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है।


