संसद के मानसून सत्र के बीच पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में उस समय बड़ी हलचल मच गई, जब शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल अचानक दिल्ली पहुंचे और संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बैठक के बाद पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों और सुगबुगाहटों का बाजार गर्म हो गया है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुलाकात को लेकर तीखा तंज कसा है।
संसद भवन में हुई अहम मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल संसद भवन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार व राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि अकाली दल की ओर से इस बैठक को पंजाब के किसानों, बंदी सिखों की रिहाई और प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बताया जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे भाजपा-अकाली दल के संभावित पुनर्मिलन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
- पंजाब के मुख्य मुद्दों पर चर्चा: बैठक में पंजाब की मौजूदा स्थिति, कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर बातचीत होने की खबर है।
- गठबंधन की सुगबुगाहट: किसान आंदोलन के दौरान एनडीए (NDA) से अलग हुए अकाली दल के रुख में आए बदलाव और हालिया राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बैठक के गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल का तीखा पलटवार
प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादल की इस अचानक हुई मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जोरदार हमला बोला। केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि अकाली दल और भाजपा का एक-दूसरे से अलग होने का नाटक अब खत्म हो चुका है।
- “जनता के सामने बेनकाब हुए दोनों दल”: केजरीवाल ने कहा कि पंजाब की जनता पहले ही समझ चुकी थी कि दोनों दल पर्दे के पीछे से एक साथ काम कर रहे हैं।
- पंजाब की जनता को धोखा देने का आरोप: उन्होंने कहा कि सत्ता की खातिर किसान विरोधी ताकतों के साथ फिर से हाथ मिलाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन पंजाब के लोग अब इनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं।
सियासी मायने और पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने साल 2020 में एनडीए गठबंधन से अपना नाता तोड़ लिया था। हालांकि, इसके बाद हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में दोनों दलों को अकेले चुनाव लड़ने पर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मजबूत होती कांग्रेस के मुकाबले अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए दोनों पुरानी सहयोगी पार्टियों के बीच दोबारा समझौते की चर्चाएं लंबे समय से चल रही थीं।
संसद भवन में पीएम मोदी और सुखबीर बादल के बीच हुई इस मुलाकात ने पंजाब की भावी राजनीति का नया खाका खींच दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सुगबुगाहट औपचारिक गठबंधन का रूप लेती है या केवल सियासी चर्चाओं तक सीमित रहती है।


