संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा और लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब विपक्षी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति और जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार करते हुए विपक्ष को जमकर आड़े हाथों लिया। रिजिजू ने कहा कि “अमित शाह का नाम सुनते ही तो आतंकी तक कांप उठते हैं। जब गृह मंत्री सदन में जवाब देना शुरू करेंगे, तो विपक्ष के लिए उसे सुनना या सहना भी मुश्किल हो जाएगा।”
”अमित शाह का नाम सुनते ही कांपते हैं आतंकी”: रिजिजू का करारा प्रहार
विपक्ष द्वारा ‘गृह मंत्री सदन में आओ’ के लगाए जा रहे नारों पर सख्त ऐतराज जताते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा और जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- संसद में गृह मंत्री की उपस्थिति: रिजिजू ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री अमित शाह सुबह से लेकर देर रात तक संसद परिसर में ही उपस्थित रहते हैं और अपने विधायी व प्रशासनिक दायित्वों को पूरा कर रहे हैं।
- विपक्ष पर तंज: उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ राजनीतिक ड्रामा और हंगामा खड़ा करना चाहता है। यदि विपक्ष में सच सुनने का साहस है, तो उन्हें मर्यादा में रहकर चर्चा में भाग लेना चाहिए।
- सख्त रुख का संदेश: रिजिजू ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में गृह मंत्री के कड़े फैसलों से आतंकी भी कांपते हैं।
संसद में हंगामे की मुख्य वजह
सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों (विशेष रूप से कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों) ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और सभापति से गृह मंत्री को सदन में बुलाने की मांग की।
- विपक्ष की मांगें: राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी सदस्यों ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मुद्दों पर गृह मंत्री से सीधे बयान की मांग की।
- सदन में तनातनी: सभापति के बार-बार शांत रहने की अपील के बावजूद विपक्ष के सदस्य वेल (Well) के पास आकर नारेबाजी करते रहे।
- कार्यवाही पर असर: इस भारी हंगामे और गतिरोध के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
राजनीतिक मायने
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार विपक्ष के दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है। जहां एक तरफ विपक्ष आगामी चुनावों और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल (भाजपा) आक्रामक रुख अपनाकर विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दे रहा है। रिजिजू के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और बयानबाजी का नया दौर शुरू कर दिया है।


